अपने मन को दुनियावी बातों पर नहीं, बल्कि आसमानी बातों पर टिकाए रखें।
हवाई जहाज़ के सफ़र का सबसे अफ़रातफ़री भरा हिस्सा ज़्यादातर हवाई अड्डे पर होता है। हर तरफ़ लोग ही लोग होते हैं, कहीं खोए हुए सामान के ढेर और हवाई अड्डे के कर्मचारी इधर-उधर भागतें हुए दिखाई देतें है। उस पूरे शोर-शराबे के बीच, आपको यह समझना होता है कि आपका गेट कौन-सा है और वहाँ कैसे पहुँचना है।
लेकिन जब आख़िरकार आप अपनी सीट पर पहुँच जाते हैं और हवाई जहाज़ उड़ान भरता है, तो कुछ ही पलों में वह बड़ा, हवाई अड्डा छोटा लगने लगता है यहाँ तक कि वह नीचे ज़मीन पर बस एक छोटा-सा बिंदु रह जाता है।
आपका नज़रिया बदल जाता है। जिस हलचल और भीड़-भाड़ के बीच आप अभी-अभी थे, उससे अचानक बहुत ऊपर उठ जाते हैं और सारा हंगामा अब आप पर असर नहीं करता।
इतना ही नहीं, जैसे-जैसे आप और ऊँचाई पर जाते हैं, आपको रूपरेखाएँ साफ़-साफ़ नज़र आती हैं: टर्मिनल, रनवे, सड़कें, खेत, नदियाँ। अचानक सब कुछ साफ़ और सलीक़े से सजा हुआ नज़र आने लगता है। तब एहसास होता है कि सब कुछ किसी गहरी और समझदार व्यवस्था के तहत चल रहा है।
ठीक इसी तरह, हमारी ज़िंदगी भी तब ज़्यादा उलझी हुई और भारी लग सकती है जब हम रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों और संघर्षों के बीच होते हैं। लेकिन ख़ुदा सब कुछ एक आसमानी नज़रिये से देखता है। वह उन रूपरेखाओं को जानता है जो खुलते जा रहे हैं क्योंकि उसने इस दुनिया की व्यवस्थाएँ ख़ुद बनाई हैं।
जब आप अपनी नज़रें उस पर टिकाना शुरू करते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि आपका नज़रिया भी बदलने लगता है। जितना ज़्यादा आप ख़ुदा की महानता और जलाल पर ग़ौर करते हैं, उतनी ही छोटी आपकी परेशानियाँ लगने लगती हैं।
इसी वजह से पौलुस ने लिखा:
*“अपने मन को दुनियावी बातों पर नहीं, बल्कि आसमानी बातों पर टिकाए रखें।”— कुलुस्सियों ३:२ HINOVBSI
तो आज मैं आपको यह चुनौती देना चाहता हूँ: अपनी ज़िंदगी के सारे शोर-शराबे और अफ़रातफ़री से ऊपर नज़र उठाओं और यह समझो कि ख़ुदा ने आपकी हिफ़ाज़त के लिए, आपके भविष्य के लिए और आपकी भलाई के लिए व्यवस्थाएँ और रूपरेखाएँ पहले से ही तय कर रखी हैं।