वह कहता है, ‘ख़ामोश हो जाओ’ और जान लो कि मैं ही ख़ुदा हूँ।
हम इस सीरीज़, ‘७ तरीक़े, जिससे ख़ुदा हमक़लाम होता है’, के आख़री दिन पर आ पहुँचे हैं। आज मैं उस तरीक़े पर ग़ौर करना चाहती हूँ जो शायद सबसे कम साफ़ नज़र आता है बल्कि आप तो यह भी कह सकते हैं कि इसकी फ़ितरत ही कुछ हद तक विरोधाभासी है…।
लेकिन ख़ुदा ख़ामोशी के ज़रिये भी हमक़लाम होता है।
एक कहावत है कि ‘ख़ामोशी हज़ार लफ़्ज़ों से ज़्यादा बोलती है’ और ख़ुदा के मामले में यह बात पूरी तरह सच है। वह अक़सर हमारे दिलों से बात करने के लिए ख़ामोशी को चुनता है।
*”वह कहता है, ‘ख़ामोश हो जाओ’ और जान लो कि मैं ही ख़ुदा हूँ।”- भजन संहिता ४६:१० HINOVBSI
आज के दौर में ऐसा लगता है कि हर ख़ामोशी को कोई आवाज़ से भर देना ज़रूरी हो गया है। हमारी ज़िंदगी का हर पल किसी न किसी चीज़ से भरा रहता है। संगीत, बातचीत, सोशल मीडिया से आती जानकारियों की बौछार, या फ़िर बस शोर।
मगर इतिहास में ख़ुदा के कुछ सबसे महान सेवक और सेविकाओं ने ख़ामोशी की अहमियत को समझा। कई बार तो वे रोज़ घंटों तक सिर्फ़ चुप रहकर ख़ुदा को खोजते थे।
मदर टेरेसा से एक इंटरव्यू में पूछा गया: “आप जब दुआ करती हैं, तो क्या कहती हैं?” उन्होंने जवाब दिया, “कुछ नहीं, मैं सिर्फ़ सुनती हूँ।” फ़िर रिपोर्टर ने पूछा, “तो फ़िर ख़ुदा आपसे क्या कहता है?” उनका जवाब था: “ज़्यादा कुछ नहीं, वह भी बस सुनता है।”
हालाँकि ख़ुदा के पास यह सामर्थ्य है कि वह अपनी बात गड़गड़ाते बादलों और कड़कती आवाज़ों के साथ कहने की पूरी ताक़त रखता है, फ़िर भी वह उन्हें ख़ामोशी में हमसे फुसफुसाना चुनता है। नबी एलिय्याह ने यह अनुभव १ राजा १९ में किया:
“ख़ुदा वहाँ से गुज़रा और एक बड़ी और तेज़ तूफ़ान चली, जिसने पहाड़ों को चीर डाला और चट्टानों को चकनाचूर कर दिया; पर ख़ुदा उस तेज़ तूफ़ान में नहीं था। फ़िर एक भूकम्प हुआ लेकिन ख़ुदा उसमे भी नहीं था। भूकम्प के बाद आग आई, पर ख़ुदा उस आग में भी नहीं था। पर आग के बाद उसकी एक हल्की-सी, धीमी आवाज़ सुनाई दी।” — १ राजा १९:११–१२ HINOVBSI
मैं आपको प्रोत्साहित करना चाहती हूँ कि आप हर दिन कुछ वक़्त सिर्फ़ ख़ामोशी में बिताएँ। शुरुआत में यह थोड़ा अजीब-सा लग सकता है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि आप उस सुक़ून भरी ख़ामोशी में ख़ुदा को आपसे बात करते हुए महसूस करेंगे।
अगर इस आदत को शुरू करने में आपको मदद चाहिए, तो मैं आपको प्रोत्साहित करती हूँ कि आप YouVersion Bible App पर मेरे द्वारा लिखी सीरीज़ “तन्हाई और ख़ामोशी” को ज़रूर पढ़ें।
यह एक सुंदर शुरुआत हो सकती है, जहाँ आप ख़ामोशी में ख़ुदा की आवाज़ और उसकी मोहब्बत को महसूस कर सकतें हैं।