तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे और बूढ़े, सपने।
क्या कभी ऐसा हुआ है कि, रात की नींद से उठने के बाद आपको कोई सपना बहुत साफ़-साफ़ याद रहा?
मेरे साथ ऐसा कभी-कभार होता है, हर बार नहीं। ज़्यादातर मेरे ख़्वाब उन्हीं बातों की परछाइयाँ होती हैं, जिन पर मैं पिछले दिन सोचती रही होती हूँ, या जो ख़याल मेरे ज़हन में कहीं अटके रह जाते हैं। कभी हाल ही में देखी किसी फ़िल्म के दृश्य उनमें उतर आते हैं, तो कभी किसी ऐसे शख़्स की झलक दिखाई देती है जिसकी सोशल मीडिया पोस्ट ने मेरा ध्यान खींच लिया हो। लेकिन जैसे-जैसे नींद खुलती है, ख़्वाब की बारीकियाँ धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं और कुछ ही पलों में वह पूरा ख़्वाब यादों की सतह से फ़िसलकर कहीं खो जाता है, मानो था ही नहीं।
मग़र जब कोई ख़्वाब मेरे दिल में यूँ ठहर जाता है कि वह बिल्कुल स्पष्ट रूप से याद रहे और मैं तर्क के आधार पर यह समझ न पाऊँ कि वह कहाँ से आया, तब मेरे दिल में यह यक़ीन गहरा हो जाता है कि वह ख़्वाब ख़ुदा की ओर से आया है।
बाइबल हमें बताती है कि ख़ुदा सपनों के ज़रिये हमक़लाम होता है:
*“आख़री दिनों में,” ख़ुदा फ़रमाता है, “मैं अपनी रूह सब लोगों पर उंडेल दूँगा। तुम्हारे बेटे और बेटियाँ भविष्यवाणी करेंगे, तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे और बूढ़े , सपने।” — प्रेरितों के काम २:१७ HINOVBSI
हम शायद अपने सपनों को समझा सकते हैं, लेकिन उन्हें काबू नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि सपने, ख़ुदा के लिए, हमसे बात करने का एक बेहतरीन ज़रिया बन जाते हैं, बिना हमारे दख़लअंदाज़ी के।
जिन सपनों को मैं ख़ुदा की ओर से मानती हूँ, वे हमेशा ख़ुशगवार नहीं होते। कभी-कभी वे उलझन से भरे या ख़ौफ़नाक भी होते हैं। लेकिन वे कभी डर, ग़ुनाह का एहसास, नफ़रत या उदासी नहीं भरते। इसके बजाय, वे मेरे दिल में एक गहरा सुक़ून और यक़ीन छोड़ जाते हैं।
अक़सर उनका मतलब जल्द समझ में नहीं आता। कई बार हफ़्तों या महीनों बाद जाकर मुझे एहसास होता है कि ख़ुदा मुझे क्या दिखाना चाह रहा था। बहुत बार ऐसा लगता है कि ख़ुदा अपनी रहमदिली में मुझे आनेवाली बातों के लिए पहले से ही तैयार कर रहा था, ताकि जब वह वक़्त आए, तो मेरा दिल डगमगाए नहीं।
क्या कभी आपको भी ऐसे सपने आते हैं जो सिर्फ़ रोज़मर्रा की उलझी हुई यादों के जैसे कहीं ज़्यादा लगते हैं? ऐसे सपने जो अलग हैं, आपके साथ टिके रहें, या किसी वर्तमान के अनुभव से जुड़े हुए न लगें?
मैं आपको हौसला देना चाहती हूँ कि आप उन्हें लिख लें और ख़ुदा से दुआ करें कि वह अपने वक़्त पर उनका मतलब ज़ाहिर करे।