वह, पानी के पास लगाए गए उस पेड़ के समान होगा जो अपनी जड़ें नदी तक फ़ैलाएगा।
बाइबल की किसी कहानी को पढ़ते या अध्ययन करते वक़्त, एक अच्छा तरीक़ा यह है कि ख़ुद को उस कहानी के अंदर रखकर यह सवाल पूछा जाए: “मैं किस किरदार से जुड़ता हूँ?”
हैरानी की बात यह हैं कि जब मैंने यह सवाल, ज़क्कई की कहानी पर मनन करते हुए ख़ुद से पुछा, तो मेरा जवाब था, पेड़! 🤭
आइए मैं आपको समझाता हूँ।
बाइबल में कई जगहों पर हमारी तुलना, पेड़ों से की गई है:
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*“वह इंसान उस पेड़ की तरह है जो पानी की धाराओं के पास लगाया गया है, जो अपने फ़ल सही वक़्त पर देता है और जिसके पत्ते मुरझाते नहीं और जो कुछ भी वह करता है, उसमे सफ़ल होता है।” – भजन संहिता १:३ HINOVBSI
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*“मुबारक है वह इंसान जो ख़ुदा पर ऐतबार करता है और जिसकी उम्मीद उसी में है। वह, पानी के पास लगाए गए उस पेड़ के समान होगा जो अपनी जड़ें नदी तक फ़ैलाएगा। धुप में भी उसके पत्ते हमेशा हरे रहते हैं। सूखे साल के मौसम में भी वह परेशान नहीं होता और फ़ल देना कभी नहीं छोड़ता।”– यिर्मयाह १७:७-८ HINOVBSI
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*“जैसे हर अच्छा पेड़ अच्छा फ़ल देता है, वैसे ही बुरा पेड़ बुरा फ़ल देता है।” – मत्ती ७:१७ HINOVBSI
पेड़ मज़बूत, अटल, जड़ में गहरा और वक़्त के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है।
और यही मैं दूसरों के लिए बनना चाहता हूँ, एक पेड़, मजबूत और यीशु मसीह में जड़ें जमा चुका हुआ, जिसकी डालियाँ छाव और सहारा देती हैं और जिसके फ़ल तरोताज़ा करते हैं।
ज़क्कई के चारों तरफ़ मौजूद भीड़ उसे ग़ुनाहगार कहकर दोषी ठहराती है और कहती है कि वह यीशु मसीह के वक़्त और ध्यान के क़ाबिल नहीं है (लूका १९:७ )। लेकिन पेड़ ऐसा नहीं करता। ज़क्कई की कहानीमें पेड़ उसे क़ुसूरवार नहीं ठहराता और न ही अपनी शाखाओं तक पहुँचने से रोकता है। वह कुछ ख़ास नहीं करता, बस उसे सहारा देता है, ताकि ज़क्कई भीड़ से ऊपर उठकर यीशु मसीह को देख सके।
उसी तरह, मैं दूसरों को यीशु मसीह की तलाश करने के लिए, मदद करना चाहता हूँ। उन्हें ऊपर उठाना चाहता हूँ, सिर्फ़ इस वजह से कि मैं ख़ुद मसीह में मज़बूती से जुड़ा हुआ हूँ।
और आप? इस कहानी में आप ख़ुद को किस किरदार से जोड़ना चाहोगे? ज़क्कई, पेड़ या और कोई?