राई के दाने जितना ईमान, गूलेर के पेड़ जितने ग़ुनाहों को हटा सकता है।
“शैतान वाक़ई छोटी-छोटी बातों में है” एक अंग्रेज़ी दुनियावी कहावत है जिसका मतलब यह हैं, कि अगर आप छोटी-छोटी बातों पर ग़ौर नहीं करेंगे, तो नतीजा बहुत बुरा हो सकता है।
लेकिन मैं सच में यह मानती हूँ कि “ख़ुदा छोटी-छोटी बातों में ज़ाहिर होता है”। अगर ग़ौर करें तो, बाइबल की सबसे छोटी-छोटी बातों में कितने गहरे मतलब और राज़ छुपे नज़र आएंगे।
मिसाल के तौर पर, ज़क्कई की कहानी में साफ़ रूप से लिखा है, कि वह एक गुलेर के पेड़ पर चढ़ा था। लूका ने क्यों सिर्फ़ “पेड़” नहीं लिखा? क्यों यह ज़िक्र करना ज़रूरी था कि वह गुलेर का ही पेड़ था?
गुलेर के पेड़ का ज़िक्र बाइबल में महज़ कुछ ही बार किया गया हैं, लेकिन लूका की क़िताब में दो बार किया हैं।एक ज़क्कई की कहानी में और दूसरी बार, सिर्फ़ दो अध्याय पहले लूका १७ में जब यीशु मसीह, अपने चेलों से बात कर रहा था।
चेलों पर इस बात का गहरा असर पड़ा कि यीशु मसीह उनसे, चोट पहूँचाने वालों को माफ़ करने की माँग कर रहा था। इसलिए उन्होंने पुकार कर कहा, ‘हमारा ईमान बढ़ा! (लूका १७:५), क्योंकि उन्हें समझ आ गया कि इतनी बड़ी माफ़ी देने के लिए बहुत बड़े ईमान की ज़रूरत होती है।
यीशु मसीह ने जवाब दिया कि उनका राई के दाने जितना भी ईमान हो तो वह एक गूलेर के पेड़ (जिसे कभी-कभी शहतूत भी कहा जाता है) से कह सकते हैं कि वह उखड़कर समुंदर में जा गिरे (लूका १७:६)।
अगले अध्याय में, चेलों को फ़िर से चौंकाया जाता है। यीशु मसीह कहता हैं कि एक ऊँट को सुई की आँख से गुज़रना आसान हैं लेकिन ख़ुदा के राज्य में, किसी अमीर इंसान के लिए दाख़िल होना, उससे कई ज़्यादा मुश्क़िल है (लूका १८:२४-२६)।
फ़िर आती है ज़क्कई की कहानी: एक अमीर इंसान, गुलेर के पेड़ पर, जिसे माफ़ी की ज़रूरत थी। ज़क्कई में हम नामुमक़ीन को देखते हैं: एक बहुत अमीर इंसान ख़ुदा के राज्य में दाख़िल हो जाता है, पाप और बेईमानी की गुलेर से पश्चाताप की ओर बढ़ता है और दोनों ख़ुदा और उसके समाज से माफ़ किया जाता है।
यीशु मसीह पर, बस राई के दाने जितना ईमान ही काफ़ी है कि वह आपको बचाए, आपको माफ़ करे और आपके पेड़ जितने ग़ुनाहों को समुंदर में फेंक दे।
आपको बस इतना करना है कि अपना ईमान उसपर रखना हैं।