डर मत, क्योंकि मैंने तुझे आज़ाद किया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है; तू मेरा है।
अगर सिर्फ़ दो लफ़्ज़ों में, आपको ख़ुद को परिभाषित करना पड़े, तो वे क्या होंगे?
क्या आप उसमे अपनी राष्ट्रीयता शामिल करेंगे या आपका पेशा या आपकी सबसे बड़ी क़ामयाबी या आपका धर्म या शायद आपकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि?
हो सकता हैं कि सिर्फ़ दो लफ़्ज़ काफ़ी नहीं हैं।
फ़िर भी, जब लूका ने ज़क्कई की कहानी लिखी (लूका १९), तो ऐसा लगता है कि उसने उसके बारे में सिर्फ़ दो चीज़ें बताई:
*“यीशु मसीह, यरीहो में दाख़िल हुआ और वहाँ से गुज़र रहा था। वहाँ ज़क्कई नाम का एक इंसान था; वह एक मुख़्यकर वसूल करने वाला था और अमीरथा।”– लूका १९:१–२ HINOVBSI
ज़ाहिर है कि लूका ने यही काफ़ी माना कि उसे इस तरह से दर्शाया जाए। तो इससे हम क्या सीखते हैं?
कर वसूल करना, हमेशा अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरी नहीं थी। यह सिर्फ़ तभी लाभदायक होता था जब आप, जो कर वसूल कर रहे हैं, उससे ज़्यादा अपने लिए रखें। इसका मतलब, ज़क्कई एक भ्रष्ट इंसान था और उसने ख़ुद भी क़बूल किया कि उसने लोगों से फ़रेब किया था। (लूका १९:८)।
जब लोगों ने देखा कि यीशु मसीह ने ज़क्कई के घर, ख़ुद को आमंत्रित किया, तो उन्होंने कहा: *“वह एक पापी इंसान का मेहमान बनने गया है।” – लूका १९:७
लोग ज़क्कई को धनवान, बेईमान और पापी के रूप में परिभाषित करते थे।
लेकिन यीशु मसीह, जब उसे देखता हैं, तो उसे उसके नाम से पुकारता हैं, ज़क्कई जिसका मतलब हैं ‘शुद्ध’। भले ही उस वक़्त ज़क्कई बेईमान था, वही नाम यीशु मसीह ने उसे बुलाने के लिए चुना।
यीशु मसीह हमें हमारे ग़ुनाहों या ग़लतियों से नहीं पहचानता, बल्कि इस बात से कि उसने हमें क्या बनने के लिए रचाया हैं; शुद्ध, बे-दाग़, पाक और भले कार्य करने वाले।
आप चाहे ख़ुद को कैसे भी परिभाषित करें, यीशु मसीह आपकी असलियत से वाकिफ़ हैं। आपके हर ग़ुनाह और हर अँधेरे कामों को जानते हुए वह आपको आपके नाम से बुलाने का चुनाव करता हैं:
*“डर मत, क्योंकि मैंने तुझे आज़ाद किया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है; तू मेरा है।” – यशायाह ४३:१ HINOVBSI