देखों, मैं दरवाज़े पर खड़ा हूँ और दस्तक दे रहा हूँ।
मैं आपको डच शादियों के एक ऐसे रिवाज़ के बारे में बताना चाहती हूँ, जो कई भारतीय शादियों से काफ़ी अलग होता है। हमारे यहाँ मेहमानों को अलग-अलग श्रेणियों में आमंत्रित किया जाता है। सबसे क़रीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को रात के खाने के लिए औपचारिक निमंत्रण मिलता है, और वे जश्न के अंत तक ठहरते हैं। वहीं अन्य मेहमानों को महज़ शाम के रिसेप्शन के लिए (चाय-पानी के साथ) बुलाया जाता है और उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे रात के खाने के समय तक न रुकें। 🤯
आमतौर पर, डच शादी के कार्ड पर यह साफ़-साफ़ लिखा होता है कि मेहमान, कार्यक्रम के किस हिस्से में शामिल हो सकते हैं। लेकिन जब ऐसा स्पष्ट नहीं लिखा होता, तो यह मेहमानों को असमंजस में डाल सकता है। वे यह सोचने लगते हैं कि क्या दूल्हा-दुल्हन सचमुच चाहते हैं कि वे वहाँ रुकें, या फ़िर उन्हें पहले ही विदा हो जाना चाहिए था। 😬
मुझे स्पष्ट दावत पसंद है जो ज़ाहिर करती हैं कि मेरी मौजुदगी कितनी अहम है। यीशु मसीह को भी ऐसी स्पष्ट दावत पसंद है। वह भी हमारे निमंत्रण पर जवाब देना पसंद करता हैं।
जब यीशु मसीह, इम्माऊस की राह पर अपने दो चेलों के साथ चल रहा था, तो उसने ऐसा प्रकट किया मानो वह आगे बढ़ जाएगा और उनके साथ नहीं ठहरेगा। लेकिन चेलों ने आग्रह करके उसे अपने साथ ठहरने का निमंत्रण दिया और तब वह उनके साथ ठहर गया। (लूका २४:२८–२९)
यीशु मसीह ने अपने आप को, ज़बरदस्ती उनके घर में ले जाना नहीं चाहा। उसने उन चेलों के आमंत्रण का इंतज़ार किया, और फ़िर वो उनके कहानी का अहम हिस्सा बन गया।
आज भी यही सच है। यीशु मसीह कभी भी अपने आप को हम पर थोपता नहीं हैं। हमें मानने के लिए, वह ज़ोर-ज़बरदस्ती करके, मजबूर नहीं करता। बल्कि वह चाहता है कि हम उसे हमारे घरों और दिलों में आने के लिए दावत दे।
यीशु मसीह कहता हैं:
*“देखों, मैं दरवाज़े पर खड़ा हूँ और दस्तक दे रहा हूँ। अगर कोई मेरी आवाज़ सुने और दरवाज़ा खोले, तो मैं उसके पास अंदर आऊँगा और उसके साथ खाना खाऊँगा, और वह मेरे साथ।”— प्रकाशितवाक्य ३:२० HINOVBSI
अगर आप यीशु मसीह को अपनी ज़िंदगी में न्योता देना चाहतें हैं, तो मेरे साथ यह दुआ करें:
“प्रभु यीशु मसीह, मैं तूझे अपने घर और अपने दिल में आमंत्रित करती हूँ। क्या तू मेरी ज़िंदगी में अपनी रहनुमाई के अनुसार काम करेगा? मेरे दिल को तेरी मोहब्बत से भर दें। बिना किसी ज़ोर ज़बरदस्ती के मुझे ढूँढने के लिए और जहाँ मैं हूँ (जैसा भी मैं हूँ?), वहीं मुझसे मिलने के लिए तेरा शुक्रिया।”