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Publication date 10 अप्रै. 2026

जब मैं अजनबी था तूने मेरी ख़ातिरदारी की।

Publication date 10 अप्रै. 2026

यह वाक्य, “अनजान इंसान से सावधान”, ज़्यादातर बच्चों को चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल होता है कि वे अजनबी लोगों पर भरोसा न करें और महफूज़ रह सकें।

अक़सर, बड़े होने तक, अजनबियों से सावधान रहने का यह रवैया बना रहता है। और ज़्यादातर मामलों में यह सही भी है, क्योंकि हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ बुरे लोग बहुत सी बुरी बातें करते हैं।

हालाँकि, बाइबल हमें यह भी बताती है कि हमें अजनबियों का स्वागत करना चाहिए:

*“जब मैं भूखा था, तुमने मुझे खाना खिलाया, जब मैं प्यासा था, तब पानी पिलाया, जब मैं अजनबी था तुमने मेरी ख़ातिरदारी की।”मत्ती २५:३५ HINOVBSI

इम्माऊस की राह पर चेलों की कहानी में हम देखते हैं कि यीशु मसीह ख़ुद एक अजनबी के रूप में उनके सामने आता हैं, क्योंकि लिखा हैं कि वे दोनों उसे पहचान नहीं पाते हैं (लूका २४:१६)।

इसके बाद, सफ़र के दौरान और खाने की मेज़ पर, एक ख़ूबसूरत और लंबी चर्चा होती है। चेलें बाद में एक-दूसरे से कहते हैं: “क्या हम हमारे दिल के अंदर से जल नहीं रहे थे जब वह हमारे साथ बातें कर रहा था?”लूका २४:३२ HINOVBSI

सोचिए, अगर उन्होंने उस अजनबी को नजरअंदाज़ किया या नकारा होता तो क्या होता? या अगर उन्होंने कहा होता कि उनकी बातचीत व्यक्तिगत है? वे शायद यीशु मसीह के इस बेहद क़रीबी अनुभव को खो देते।

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी यीशु मसीह हमारे पास अचानक और अजनबी तरीक़ों से ज़ाहिर होता हैं। मसीही होने के नाते, हमें कभी-कभी सिर्फ़ उन्हीं लोगों के साथ जुड़ना पसंद होता हैं जो सिर्फ़ हमारे जैसे सोचते हैं।

लेकिन किसी अजनबी को अपनाने में एक ख़ास ताक़त भी है। हमे यह देखने का मौक़ा मिलता हैं कि यीशु मसीह, उनके ज़रिये क्या ज़ाहिर करना चाहता हैं।

अगली बार जब आप किसी ऐसे शख़्स से मिले, जिसका अंदाज़, ज़िंदगी जीने का तरीक़ा, जातीय पृष्ठभूमि, या किसी अहम विषय पर विपरीत नज़रिया आपसे बिलकुल अलग हैं, या बस वह इंसान ज़िंदगी के कोई अजीब दौर में हैं, तो इस कहानी को ज़रूर याद रखें।

क्या आप, इम्माऊस की राह पर चलनेवाले चेलों की तरह, उस अजनबी इंसान को अपनाने के लिए राज़ी हैं?

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.