यीशु मसीह की आत्मा को वे न तो छीन सके, न ही तोड़ सके।
आज पवित्र शनिवार है, वह दिन जो यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने और उसके पुनरुत्थान के बीच आता है। यह दिन को परंपरागत मातम, इंतज़ार और ख़ामोश दिली सोच का दिन समझा जाता है।
इसलिए आइए, हम मिलकर यीशु मसीह के उन आख़री लफ़्ज़ों पर मनन करें जो उसने अपनी मौत से पहले कहे थे:
*“यीशु मसीह ने ज़ोर से पुकार कर कहा, “पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हवाले करता हूँ।” यह कहकर उसने अपनी आखरी सांस ली। — लूका २३:४६ HINOVBSI
लगभग १२ लंबे घंटों तक यीशु मसीह कई अलग-अलग हाथों में से होकर गुज़रा। कई अधिकारीयों, धर्म के ठेकेदारों और रोमन सिपाहीयों के हाथ जिन्होंने उसे मारा, उसकी दाढ़ी नोची, काँटों का ताज उसके सिर पर रख दिया और आख़िरकार उसकी कलाईयों और पैरों में कीलें ठोक कर उसे क्रूस पर लटकाया।
लेकिन आख़िर में, यीशु मसीह ने अपनी आत्मा उन हाथों में नहीं, बल्कि अपने आसमानी पिता के हवाले कर दी।
उस दिन जो कुछ भी हुआ, उस सब पर ख़ुदा की ही हुकूमत थी। और चाहे उन्होंने उसके शरीर को जितनी भी यातना दी और सताया, वो यीशु मसीह की आत्मा को न तो ले सके और न तोड़ सके। क्योंकि वह आत्मा उसके आसमानी पिता की थी।
यह मुझे यीशु मसीह की वे बातों की याद दिलाता है जो उसने यूहन्ना १०:२७–३० में कहा है:
*“मेरी भेड़ मेरी आवाज़ सुनती हैं; मैं उसे जानता हूँ और वे मेरे पीछे चलती हैं। मैं उसे अब्दी ज़िंदगी देता हूँ और वो कभी नाश नहीं होंगी; कोई उसे मेरे हाथ से छीन नहीं सकता। मेरा पिता जिसने उसे मुझे दिया है, सब से अज़ीम है; कोई उसे मेरे पिता के हाथ से भी नहीं छीन सकता। मैं और पिता एक हैं।” — यूहन्ना १०:२७–३० HINOVBSI
ठीक वैसे ही जैसे यीशु मसीह की, वैसे आपकी आत्मा भी ख़ुदा में महफूज़ है और कभी भी ख़ुदा के हाथों से छीनी नहीं जा सकती। जब आप यीशु मसीह पर ईमान रखते हैं, तो आपकी आत्मा हमेशा के लिए उसकी हो जाती है।
सब कुछ ख़ुदा के क़ाबू में हैं! आप चाहे इस वक़्त जिस भी मुश्क़िलों से, दर्द या संघर्ष से गुज़र रहे हैं, यीशु मसीह, क्रूस पर उससे होकर पहले ही गुज़र चुका हैं। आख़िर में, आपकी सबसे बड़ी दौलत आपकी आत्मा हैं और वह उसकी मोहब्बत भरी हाथों में महफूज़ है।