क्रूस पर, यीशु मसीह की क़ुर्बानी काफ़ी थी।
किसी लंबे, मुश्क़िल और दर्दनाक काम को अंजाम देने के बाद, यह कह पाना कि “पूरा हुआ!” सुक़ून दायक होता है।
यीशु मसीह ने भी, बारह घंटे का बेहद असहनीय दर्द, ज़ुल्म और बेइज़्ज़ती सहने के बाद कहा, “सब पूरा हुआ।” (यूहन्ना १९:३०) लेकिन जहाँ हमें किसी काम के पूरा होने पर संतुष्टि मिलती है, वहाँ यीशु मसीह ने अपनी आत्मा सौंप दी और हमारे ग़ुनाहों के लिए क़ुर्बानी दी।
*“वह हमारे अपराधों के कारण घायल किया गया, हमारी बदकारियों के कारण कुचला गया; हमारी शांति के लिए जो सज़ा थी वह उस पर पड़ी और उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए हैं।” — यशायाह ५३:५ HINOVBSI
जिस लफ्ज़ का इस्तेमाल यीशु मसीह ने “सब पूरा हुआ” कहने के लिए किया, वह था “टेटेलेस्टाइ”, जिसका मतलब है “पूरी तरह चुका दिया गया।”
उसने यह कहकर महज़ यह नहीं ज़ाहिर कि उसके दर्द का सफ़र ख़त्म हो गया था, बल्कि यह भी ऐलान किया कि यह उसकी क़ुर्बानी हमारे ग़ुनाहों का पूरा क़र्ज़ चुका देने के लिए काफ़ी थी।
*“ग़ुनाह की मज़दूरी मौत है, पर हमारे लिए यीशु मसीह में, ख़ुदा का इनाम अब्दी ज़िन्दगी है।” — रोमियों ६:२३ HINOVBSI
यीशु मसीह ने क्रूस पर जो क़ीमत चुकाई, वह पूरी तरह काफ़ी थी। उसने हमारे सारे ग़ुनाहों, भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल के, सबका दाम चुका दिया।
यह सोचना कि हम ग़ुनाह करने पर अपना उद्धार खो सकते हैं, एक झूठ है। मग़र यह भी सोचना ग़लत हैं कि हम बहुत पाक-साफ़ कार्यों के ज़रिये, स्वर्ग में अपनी जगह ख़रीद सकते हैं। हक़ीक़त यह है कि हमारा कोई भी नेक़ काम, तोहफ़ा, दुआ या क़ुर्बानी, उस क़ुर्बानी की तुलना नहीं कर सकती हैं जो यीशु मसीह ने हमारे लिए क्रूस पर किया।
जब यीशु मसीह ने कहा, “सब पूरा हुआ,” तो उसने यह ऐलान किया कि धरती पर आने का उसका मक़सद पूरा हो गया है। यूहन्ना १२:४६ HINOVBSI में यीशु मसीह कहता हैं:
*“मैं दुनिया में नूर बनकर आया हूँ, ताकि जो मुझ पर ईमान लाए वह अँधेरे में न रहे।”
आज उसके नूर से अपने दिल को रोशन करने दे।