मसीह के ज़रिये, ख़ुदा ने हमारे साथ सुलह की।
क्या आपने आज अप्रैल फूल का कोई मज़ाक किया?
जब मैं छोटा था, मेरे पिता मुझे और मेरे भाई-बहनों को बेवकूफ़ बनाने का एक बहुत पसंदीदा मज़ाक किया करते थे। वह कमरे में दो गिलास लेकर आते थे और पूछते थे, “कौन लस्सी पीना चाहता है?” हम सब चिल्लाते थे, “मैं! मैं!” फ़िर वह हमें गिलास दे देते थे, लेकिन उसमें लस्सी नहीं, छाछ होती थी। 😖
जब आप मिठास की उम्मीद कर रहे हों और बदले में खारा मिल जाए, तो कितना अजीब लगता है, हैं न? जब यीशु मसीह क्रुस पर था, मरने से ठीक पहले उसने कहा, “मैं प्यासा हूँ,” लेकिन पानी देने के बजाय, लोगों ने दाख़ का सिरका पिलाया (मरकुस १५:३६)। यह बेरहमी थी!
यीशु मसीह ने यह बात एक भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए कही थी (यूहन्ना १९:२८):
*“उन्होंने मेरे खाने में पित्त मिलाया और मेरी प्यास बुझाने के लिए मुझे दाख़ का सिरका पिलाया।” — भजन संहिता ६९:२१
और यह उस दिन पूरी हुई अकेली भविष्यवाणी नहीं थी। ज्ञानी लोगों के अनुसार, जिस दिन यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया, उस दिन उसने पुराने नियम के २८ भविष्यवाणियाँ पूरी कीं। इनमें से कुछ तो ८०० साल से भी पुरानी थीं!
क्या यह मुमक़िन है कि एक ही इंसान, एक ही दिन में सदियों पुरानी, २८ भविष्यवाणियाँ पूरी कर दे और अपनी पूरी ज़िंदगी में सैकड़ों?
यीशु मसीह की मृत्यु कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं थी। यह कोई “ख़ुशकिस्मत हादसा” नहीं था जो हमारी तरफ़ से हो गया और हमें उद्धार मिल गया।
नहीं, यह ख़ुदा की एक सुंदर और गहरी योजना का हिस्सा था, जो सदियों से तैयार हो रही थी, ताकि हमें अपने साथ पुनर्मिलन में वापस लाया जाए (२ कुरिन्थियों ५:१८)।
आज कुछ वक़्त निकालकर ख़ुदा के बेमिसाल तरीक़ों के लिए उसका शुक्र अदा करें। वह कभी न-बदलनेवाला खुदा है और उसने हमें सबसे अज़ीम योजना के ज़रिये बचाया।