ख़ुदा की ख़ामोशी को कभी उसकी ग़ैर-मौजूदगी मत समझना।
अग़र आपको एक सवाल ख़ुदा से पूछने का मौक़ा मिले, तो आप क्या पूछेंगे? कोई मज़ेदार सवाल? बाइबल के बारे में कुछ ऐसा जो आप हमेशा से जानना चाहते थे? या फ़िर कोई दिल से निकला हुआ “क्यों?”
अग़र आप मेरी तरह किसी अपने को बहुत कम उम्र में खो चुके हैं, तो शायद आप भी यही पूछना चाहेंगे, “ख़ुदा, उसे इतनी जल्दी हमे क्यों छोड़कर जाना पड़ा?”
ख़ुदा से सवाल पूछने की मुश्क़िल बात यह है, कि आसमान के इस पार, ज़मीन पर रहते हुए हमें शायद कभी हमारे सवालों का जवाब न मिले।
यहाँ तक कि जब यीशु मसीह ने भी पुकार कर कहा, *“मेरे ख़ुदा, मेरे ख़ुदा, तूने मुझे क्यों त्याग दिया?” (मत्ती २७:४६ HINOVBSI), तब आसमान से कोई जवाब नहीं आया।
इसमें हमारे लिए एक बहुत अहम सबक़ छुपा है।
आपकी ज़िंदगी में भी ऐसे पल आ सकते हैं जब आप ख़ुदा से पूछेंगे, “क्यों???”
“मुझे बच्चा क्यों नहीं हो रहा?”“तूने मेरी शादी क्यों टूटने दी?”“मैंने मेरी नौकरी क्यों खो दी?”“तूने मेरे बेटे को शिफ़ा क्यों नहीं दी?”
हमें यह स्वीकार करना सीखना होगा कि हम ख़ुदा से मुश्क़िल और सच्चे सवाल पूछ सकते हैं लेकिन हो सकता है कि वह उसका जवाब न दे।
फ़िर भी, इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने दिल की बातें और अपने “क्यों?” ख़ुदा के सामने रखना बंद कर दें। वह अब भी सुन रहा है।
और सबसे ज़रूरी बात, हमें कभी भी ख़ुदा की ख़ामोशी को उसकी ग़ैर-मौजूदगी समझने की ग़लती नहीं करनी चाहिए।
ख़ुदा ने यह वादा नहीं किया कि वह हमारे हर सवाल का जवाब देगा, लेकिन उसने यह वादा ज़रूर किया है कि वह हमेशा हमारे साथ रहेगा:
*“डर मत, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ; इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा ख़ुदा हूँ। मैं तुझे सामर्थ दूँगा, तेरी मदद करूँगा और अपने धर्मी दाहिने हाथ से तुम्हें संभाले रखूँगा।” — यशायाह ४१:१० HINOVBSI
ख़ुदा को पुकारना शायद तुरंत हल न दे, लेकिन यह ज़रूर दिखाता है कि आप अब भी मानते हैं कि वह आपके क़रीब है।