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Publication date 30 मार्च 2026

क्योंकि यीशु मसीह में ख़ुदाई की भरपूरी शारीरिक रूप में निवास करती है।

Publication date 30 मार्च 2026

आपको सोमवार मुबारक हो! उम्मीद है आप हमारे साथ ईस्टर तक रहेंगे।  

इस हफ़्ते हम उस अज़ीम क़ुर्बानी को याद करने वाले हैं जो यीशु मसीह ने क्रूस पर हमारे लिए दी। हम उसके आख़री चार बातों पर ग़ौर करेंगे, क्योंकि उनमें बहुत गहरी अहमियत छुपी है।

उन चार बातों में से शायद सबसे ज़्यादा समझ में न आने वाला वाक्य था: “एली, एली, लमा सबक्तानी?” यानी, “मेरे ख़ुदा, मेरे ख़ुदा, तूने मुझे क्यों त्याग दिया?” (मत्ती २७:४६ HINOVBSI)

वहाँ खड़े लोग समझ नहीं पाए और सोचा कि यीशु मसीह, एलियाह को बुला रहा था (मत्ती २७:४७)। आज भी बहुत से धर्मशास्त्र के ज्ञानी इस पर सोचते रहते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि यीशु मसीह पूरी तरह ख़ुदा था और पूरी तरह इंसान भी (कुलुस्सियों २:९)। तो फ़िर अग़र वो ख़ुदा हैं, तो वो ख़ुदा से यह क्यों कहेगा कि आपने मुझे क्यों त्याग दिया?

शायद यह ख़ुदा के उन रहस्यमय बातों में से एक है जो हमारी समझ से परे हैं (भजन संहिता १३९:६)। 

लेकिन मुझे लगता है कि यह वह लम्हा था जहाँ यीशु मसीह की मानवता ज़ाहिर हुई। ख़ुदा के हिसाब से, यीशु मसीह जानता था की उसे क्रूस पर क़ुर्बानी क्यों देनी थी, उसने यह रास्ता ख़ुद चुना (यूहन्ना १०:१८) और हमारे लिए अपनी जान दे दी (१ यूहन्ना ३:१६)। लेकिन साथ ही साथ, अपने सबसे अँधेरे वक़्त में, एक इंसान के तौर पर, उसने ख़ुदा से यह सवाल किया, “क्यों?”

यीशु मसीह की तरह, आपके और मेरे लिए भी ख़ुदा से सवाल करना और उसे पुकारना बिल्कुल ठीक है।

अक़सर हमें यह सिखाया जाता है कि ख़ुदा पर ईमान रखना लेकिन कभी उससे सवाल न करना और सदा ख़ामोश रहना। यह भी कहा जाता है कि अपनी परेशानी या अपने सवाल पेश करना मतलब हमारा ईमान कमज़ोर है या हम अपवित्र हैं। 

मैं इससे बिल्कुल भी सहमत नहीं हूँ। अग़र यीशु मसीह अपना दर्द पिता के सामने रख सकता हैं, तो आप और मैं भी कर सकते हैं। 

और वो अकेला नहीं था। जेनी ने हाल ही में बाइबल में से उन सात लोगों के बारे में एक सीरीज़ लिखी थी, जो ख़ुदा के सामने बहुत वफ़ादार थे। मैं आपको उस सीरीज़ को ज़रूर पढ़ने की सिफ़ारिश करता हूँ, हमने उसे YouVersion Bible App पर पढ़ने की योजना की तरह पेश किया है।

हम जानते हैं कि ख़ुदा अच्छा और वफ़ादार है, लेकिन कभी-कभी हमारी हालत और इंसानियत इतनी भारी लगती है कि उस पर यक़ीन करना मुश्क़िल हो जाता है।

अपने शक़, सवाल, झुंझलाहट, सब कुछ ख़ुदा के सामने पेश करें और उसे पुकारें। वो ही उन्हें संभाल सकता है।

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.