• HI
    • AR Arabic
    • CS Czech
    • DE German
    • EN English
    • ES Spanish
    • FA Farsi
    • FR French
    • HI Hindi
    • HI English (India)
    • HU Hungarian
    • HY Armenian
    • ID Bahasa
    • IT Italian
    • JA Japanese
    • KO Korean
    • MG Malagasy
    • MM Burmese
    • NL Dutch
    • NL Flemish
    • NO Norwegian
    • PT Portuguese
    • RO Romanian
    • RU Russian
    • SV Swedish
    • TA Tamil
    • TH Thai
    • TL Tagalog
    • TL Taglish
    • TR Turkish
    • UK Ukrainian
    • UR Urdu
Publication date 28 मार्च 2026

हमें अपने ही दर्द में इतना डूबना नहीं चाहिए कि दूसरों के दर्द को अनदेखा करें।

Publication date 28 मार्च 2026

ईस्टर तक आने वाले इन दो हफ़्तों में हम यीशु मसीह की आख़री सात बातों पर ग़ौर कर रहे हैं। आज हम छठे दिन पर हैं और अब तक हम दो बातों को देख चुके हैं। अभी हम यीशु मसीह की कही गई तीसरी बात पर ग़ौर करेंगे:

*“जब यीशु ने अपनी माँ को वहाँ खड़े देखा और उस चेलें को भी जिससे वह मोहब्बत रखता था पास ही खड़ा देखा, तो उसने अपनी माँ से कहा, ‘हे नारी, यह है तेरा बेटा,’ और उस चेलें से कहा, ‘यह हैं तेरी माँ।’ और उसी वक़्त से उस चेलें ने उसे अपने घर में रख लिया।”यूहन्ना १९:२६–२७ HINOVBSI 

इस कहानी में यीशु मसीह की माँ, मरियम के लिए मेरा दिल टूट जाता है। कोई भी माँ-बाप अपने बच्चे को मरते हुए नहीं देखना चाहिए। मैं उस दर्द को बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। 💔

यीशु मसीह ने मरियम से उस वक़्त यह बात कही जब वह ज़ख़्मी हालत में, मौत के बिलकुल क़रीब था।

जब यीशु मसीह मरियम से कहता हैं, “हे नारी, यह है तेरा बेटा,” और यूहन्ना से कहता हैं, “यह हैं तेरी माँ,” तो वह असल में यह इंतज़ाम कर रहा होता हैं कि अबसे मरियम की देखभाल यूहन्ना करेगा। उस वक़्त तक यीशु मसीह के पिता, यूसुफ़ की मौत हुई थी और सबसे बड़े बेटे होने के नाते अपनी बूढ़ी, विधवा माँ की देखभाल करना यीशु मसीह की ज़िम्मेदारी थी।

अपने सबसे बड़े दर्द के बीच, जब वह अपनी जान के लिए जूझ रहा था, यीशु मसीह की बे-गरज़ मोहब्बत एक बार फ़िर नज़र आती है। वह अपने ख़ुद के असहनीय दर्द से ज़्यादा अपनी माँ की भलाई की फ़िक्र करता हैं।

यहाँ हमारे लिए एक बहुत ख़ूबसूरत सबक़ है: हमें अपने ही दर्द में इतना डूबना नहीं चाहिए कि दूसरों के दर्द को अनदेखा करें।

हम सबकी ज़िंदगी में बहुत कुछ चल रहा होता है। अक़सर हम अपनी ही दुनिया, अपने ही संघर्षों और अपनी ही हालातों में इतने उलझ जाते हैं कि हमारे आसपास लोग क्या झेल रहे हैं, यह हमें दिखाई ही नहीं देता।

यक़ीनन आज आपके आसपास भी ऐसे लोग हैं जो ग़म में डूबें हुए हैं, तकलीफ़ में हैं या जिन्हें देखभाल की ज़रूरत है। कुछ वक़्त निकालकर, अपनी फ़िक्रों को थोड़ी देर के लिए भुलाकर और ख़ुदा से यह पूछें, “क्या कोई है जिसे आप चाहते हैं कि मैं देखूँ?” फ़िर उनकी तरफ़ मदद का हाथ बढ़ाएँ।

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.