हमारे ग़ुनाह असीम हैं, लेकिन ख़ुदा की मोहब्बत अज़ीम है।
कल हमने यह सवाल पूछा था कि जब यीशु मसीह ने कहा, “ऐ पिता, इन्हें माफ़ कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।” — लूका २३:३४ HINOVBS, तो वह किन लोगों की तरफ़ इशारा कर रहा था?
क्या वह अपने पकड़ने वालों की बात कर रहा था, अपने सताने वालों की, या शायद अपने उन दोस्तों की जिन्होंने उसे छोड़ दिया था?
यहाँ एक और मुमक़िन बात है जिस पर हम ग़ौर कर सकते हैं। क्या यह संभव है कि जब यीशु मसीह ने “इन्हें” कहा, तब वह आपकी और मेरी ओर इशारा कर रहा था?
आख़िरकार, हमारी ही माफ़ी के लिए तो यीशु मसीह क्रूस पर क़ुर्बान हुआ:
*“ख़ुदा हमसे अपनी मोहब्बत इस तरह ज़ाहिर करता है कि जब हम अब भी गुनहगार ही थे, तब मसीह हमारे लिए मरा।” — रोमियों ५:८ HINOVBSI
और:
*“वह ख़ुद हमारे ग़ुनाहों को अपनी देह में क्रूस पर उठा ले गया, ताकि हम पाप के लिए मर जाएँ और धार्मिकता के लिए जीएँ; उसी के ज़ख़्मों से तुम चंगे हुए हैं।” — १ पतरस २:२४ HINOVBSI
जब यीशु मसीह क्रूस पर जान दे रहा था, तब वह हमारे ही लिए अपने आसमानी पिता से माफ़ी माँग रहा था।
क्रूस पर यीशु मसीह के दर्दनाक सफ़र को स्मरण करते हुए यह समझना कि हक़ीक़त में हमारे ही पाप उसे उस क्रूस तक ले गए, हमारे दिलों में दोष-बोध का भाव जगा सकता है। पर इसमें सबसे ख़ूबसूरत और आश्चर्यजनक सच्चाई यह है कि जब यीशु मसीह क्रूस पर था, तब उसकी आँखों के सामने एक ऐसी आनंदपूर्ण आशा थी, जिसने उसे वह सब सहने की सामर्थ दी:
*“उस ख़ुशी के ख़ातिर जो उसके सामने रखी गई थी, उसने क्रूस की बेरहम मौत भी सह ली और उसकी रुसवाई की परवाह न की।” — इब्रानियों १२:२ HINOVBSI
वह ख़ुशी आप और मैं थे! हमारे और हमारे आसमानी पिता के बीच सुलह और गहरा रिश्ता, यही वह आशा थी जिसने यीशु मसीह को क्रूस की बेरहम मौत सहने की ताक़त दी (२ कुरिन्थियों ५:१८)।
हमारे ग़ुनाह असीम हैं, लेकिन ख़ुदा की मोहब्बत अज़ीम है।
अग़र आपने कभी ऐसा नहीं किया है, तो आज इस साधारण सी दुआ के ज़रिये, यीशु मसीह की माफ़ी क़बूल करें:
“यीशु मसीह, मैं तूझे अपनी ज़िंदगी का ख़ुदावंद और उद्धार देने वाला क़बूल करता हूँ। मैं मानता हूँ कि मैं ग़ुनाहगार हूँ, लेकिन मैं तेरा शुक्रिया करता हूँ कि तू मेरे ग़ुनाहों के लिए क़ुर्बान हुआ। मेरी मदद कर कि मैं अपनी पुरानी राहों को छोड़ दूँ और तेरा अनुसरण करूँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।”