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Publication date 22 मार्च 2026

ख़ुदा आपकी बदले की आग को भी संभाल सकता है।

Publication date 22 मार्च 2026

हम इस सीरीज़ के आख़री दिन पर आ पहुँचे हैं। वो सीरीज़ जिसमें हमने ख़ुदा के सामने बेझिझक सच्चाई से पेश आने की बात की और ऐसा लगता है कि यह सप्ताह सिर्फ़ विलाप से ही भरा हुआ हैं।

हालाँकि, मैं आपको यह सलाह देती हूँ कि, आप शिकायतों और नकारात्मक सोच के चक्र में न फँस जाएँ, लेकिन मेरी उम्मीद है कि आप इस हफ़्ते से यह सीखकर जाएँ कि कभी-कभी ख़ुदा के सामने बे-झिझक और ईमानदारी से बोलने में कोई बुराई नहीं है। (उपदेशक ३:४).

राजा दाऊद, इबादत और शिक़ायत, दोनों के संतुलन में माहिर था। जो बात मुझे सबसे दिलचस्प लगती है, वो यह कि बाइबल में जितनों ने भी दुआ की, उनमें दाऊद सबसे ज़्यादा अपने दुश्मनों के बारे में बदले की दुआएँ करता हैं। मिसाल के तौर पर:

*“उसके दिन थोड़े हो जाएँ; और उसकी अगुवाई की जगह कोई और ले। उसके बच्चे अनाथ हो जाएँ और उसकी पत्नी विधवा। उसके बच्चे भटकते-फ़िरें, भीख माँगते रहें; और उनके उजड़े हुए घरों से उन्हें बे-दख़ल किया जाए।” भजन संहिता १०९:८-१० HINOVBSI  

और

*“उनकी आँखों पर अँधेरा छा जाए कि वे देख न सकें और उनकी पीठ हमेशा के लिए झुकी रहे। अपना क्रोध उन पर उँडेल दे; तेरा सख़्त ग़ुस्सा उन पर हावी हो।”भजन संहिता ६९:२३-२४ HINOVBSI 

😳 😳

ये अल्फ़ाज़ वाक़ई बहुत सख़्त और कड़वे हैं। दाऊद अपने दुश्मनों के लिए अपनी एहसासात को बिल्कुल मीठा बनाकर पेश नहीं करता है। तो फ़िर हम इन आयतों से क्या सीख सकते हैं?

क्या मैं आपको यह कह रही हूँ कि आप और ज़्यादा बदलें की भावना रखनेवालें बन जाएँ और जो नापसंद हो, उनके लिए बुरी दुआएँ करने लगें? नहीं! बिल्कुल नहीं।

लेकिन मैं यह ज़रूर कहूँगी कि जो भी इंतक़ामी या चुभते हुए ख़याल आप अपने दिल में दबाए फ़िर रहें हैं, उन्हें ज़ाहिर करें, लोगों पर नहीं, बल्कि ख़ुदा के सामने पेश करें। क्योंकि ख़ुदा आपकी बदले की आग को संभाल सकता है।

उन बुरे ख़यालों को अपने दिमाग़ में बस ने न दें, सिर्फ़ इसलिए कि आपको लगता है कि ये ख़ुदा के सामने रखने के लिए बहुत ना-पाक़ हैं। वह पहले से ही उन ख़यालों को जानता है!

यह एक रूहानी उसूल है कि जो बातें आप रौशनी में लेकर आतें हैं, वो आप पर अपनी पकड़ खो देती हैं।

और ख़ूबसूरती यह है कि जिन दो आध्याय का मैंने ज़िक्र किया (भजन संहिता ६९ और भजन संहिता १०९) दोनों ही भजनों में दाऊद सीधे-सीधे इबादत और शुक्रगुज़ारी पर ख़त्म करता हैं। वो हमेशा इंतक़ाम पर अटका नहीं रहता; जब वो अपने दिल की हर बात ख़ुदा के हवाले करता हैं, तो फ़िर उसकी ज़बान से मोहब्बत, इबादत और शुक्र अदा का इज़हार निकलता है।

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.