ख़ुदा आपकी परेशानी को संभाल सकता है।
इस सप्ताह, हम यह सीख रहे है कि ख़ुदा के साथ पूरी ईमानदारी से पेश आने का मतलब क्या होता है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि ख़ुदा के सामने लगातार कच्ची, बे-झिझक दुआएँ रखना, अच्छी बात नहीं हैं। आख़िरकार, हमारा ख़ुदा एक पाक़ ख़ुदा है और बाइबल हमें आदरयुक्त ख़ौफ़ रखने की तालीम देती है। (सभोपदेशक १२:१३)
मसीही ईमान का एक ख़ूबसूरत विरोधाभास यह है कि एक तरफ़ ख़ुदा, सारे जहाँ का बादशाह हैं (भजन सहिंता ४७:७) और दूसरी तरफ़ हमारा क़रीबी दोस्त भी (नीतिवचन १८:२४)।
मूसा ने इसे सबसे बेहतर समझा था। बाइबल में बहुत कम लोग हैं जिन्होंने वाक़ई में ख़ुदा को देखा था।
उसका ख़ुदा के साथ एक ख़ास और गहरा रिश्ता था। जब मूसा चट्टान की दरार में खड़ा था, तब ख़ुदा की महिमा उसके पास से गुज़री। लेकिन मूसा की जान बचाने के लिए, ख़ुदा ने उसे अपनी ओट में ढक लिया, ताकि वह सिर्फ़ उसकी पीठ देख सके, क्योंकि कोई भी इंसान ख़ुदा का चेहरा देखकर ज़िंदा नहीं रह सकता। (निर्गमन ३३:२१-२३)।
ख़ुदा को इतने क़रीब से देखने के बाद, मूसा का, ख़ुदा के प्रति, न सिर्फ़ नज़रिया बदला लेकिन उसका रिश्ता भी और गहरा हुआ। वो और भी ज़्यादा ख़ास और क़रीबी हो गया।
ख़ुदा की शान, उसे हमसे दूर और अप्राप्य नहीं करती हैं।
इतना कुछ अपनी आँखों से देखने के बाद भी, मूसा ख़ुदा से एक दोस्त की तरह बात करता है और इस्राएल का बोझ उठाने में अपनी थकान और परेशानी उसके सामने खोलकर रख देता है। वह भली-भाँति जानता था कि उसकी मुलाक़ात सर्वशक्तिमान ख़ुदा से हुई है, फ़िर भी उसने अपने दिल की कोई बात छिपाकर नहीं रखी:
*“मैं इन सब लोगों को अकेले संभाल नहीं सकता; यह बोझ मेरे लिए बहुत भारी है। अग़र तू मेरे साथ यही सलूक करने वाला हैं, तो मेहरबानी करके अभी इसी वक़्त मुझे मौत दे। अग़र मैंने तेरी नज़र में फ़ज़ल पाई है तो मुझे मेरी अपनी तबाही का सामना न करने दे।” — गिनती ११:१४-१५ HINOVBSI
मूसा की तरह, आप भी अपने दिल की बात यीशु मसीह के सामने ख़ुलकर रख सकते हैं। ख़ुदा आपकी परेशानी को संभाल सकता है, क्योंकि उसकी मोहब्बत आप पर क़ायम है।