ख़ुदा आपके शक़ को संभाल सकता है।
यह मेरी पसंदीदा आयतों में से एक है, क्योंकि इसमें वह नर्मी और सच्चाई है जो दिल को छू लेती है। मरकुस ९:२४ में लिखा हैं:
*“ऐ ख़ुदावंद, मैं यक़ीन करता हूँ; तू मेरी बे-यक़ीनी में मेरी मदद कर!” – मरकुस ९:२४ HINOVBSI
ये अल्फ़ाज़ उस पिता के हैं जो अपने बेटे की रिहाई की उम्मीद लेकर यीशु मसीह के पास आया था, वो बेटा जो दुष्ट-आत्माओं के क़ब्ज़े में था। तब यीशु मसीह ने उस शख़्स से कहा:
*“अग़र तू ईमान रख़ सकता हैं, तो ईमान रखने वालों के लिये सब कुछ मुमक़िन है।” – मरकुस ९:२३ HINOVBSI
उसके अल्फ़ाज़ की सच्चाई और ईमानदारी, दिल को ग़हराई तक छू लेती है। वह चाहता तो सिर्फ़ अपने ईमान को दिखाता और शक़ को ज़ाहिर न करता। लेक़िन यीशु मसीह उसके दिल की उलझन से वाक़िफ़ था, जैसे वह पतरस के दिल को जानता था (मत्ती २६:३३–३५ HINOVBSI).
लेकिन अपनी पूरी बेबसी में, इस पिता ने यीशु मसीह की ओर क़दम बढ़ाया और यीशु मसीह उसके शक़ से नाराज़ नहीं हुआ।
यह कहानी मुझे थोमा की भी याद दिलाती है, जब उसे बताया गया कि यीशु मसीह मुर्दों में से जी उठा हैं, तब उसने कहा:
*“जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के निशान न देखूँ और अपनी उंगली उन घावों में न डालूँ और अपने हाथ को उसके बाज़ू में न लगाऊँ, मैं यक़ीन नहीं करूँगा” – यूहन्ना २०:२५ HINOVBSI
अक़सर थोमा को ‘शक़्क़ी थोमा’ कहा जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह उसके साथ नाइंसाफ़ी है। मैं उसे ‘तलाश करने वाला थोमा’ कहना पसंद करूँगी। उसने अपने दोस्तों के उन लगभग मुमक़िन लगने वाले दावों को ठुकराया नहीं कि कोई शख़्स सूली पर चढ़ाए जाने के बाद फ़िर ज़िंदा हो सकता है। उसने बस इतना कहा, ‘मैं ख़ुद अपने लिए जानना चाहता हूँ!
और यीशु मसीह उसकी इस तलाश में उसके पास आकर उससे कहता हैं:
*“तेरी उंगली यहाँ रख; मेरे हाथ देख। तेरा हाथ बढ़ा और मेरे बाज़ूओं में लगा। शक़ करना छोड़ दे और ईमान रख।” – यूहन्ना २०:२७ HINOVBSI
आपके दिल में कौनसे शक़ हैं?
थोमा की तरह, उन्हें यीशु मसीह के सामने लाओ क्योंकि वह आपके शक़ को संभाल सकता है। उस पिता की तरह कहें, मेरी बे-यक़ीनी में मेरी मदद कर।