ख़ुदा आपकी ख़ुद-तरसी संभाल सकता है।
मुझे खाना बनाना और नई रेसिपीज़ आज़माना बेहद पसंद है। किसी भी साफ़ और आसान रेसिपी के हिसाब से, एक ख़ूबसूरत और लज़ीज़ खाना तैयार करना, शायद ही किसी और चीज़ से ज़्यादा सुक़ून भरा अनुभव देता हो।
कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि काश ज़िंदगी भी एक आसान रेसिपी की तरह होती, जहाँ हर सही क़दम हमें बिना किसी मुसीबत के सीधे मंज़िल तक ले जाता। लेकिन अफ़सोस, ऐसा नहीं होता। सब कुछ सही करने के बावजूद, ज़िंदगी में कभी-कभी आफ़त आ ही जाती है।
ऐसा ही अनुभव अय्यूब ने किया था। बाइबल में शायद वही शख़्स है जिसके लिए मेरे दिल में सबसे ज़्यादा हमदर्दी पैदा होती है। वह पूरी तरह से धार्मिक, सीधा-सादा और ईमानदार ज़िंदगी जीता था और ख़ुदा का आदरयुक्त ख़ौफ़ रखतें हुए चलता था, फ़िर भी उसने सब कुछ खो दिया, बिना किसी क़सूर के (अय्यूब १)।
उसके बाद जो कुछ होता है, वह एक सैलाब जैसी सख़्त, कड़वी और बेबाक सच्चाई है। पूरे २० आध्याय (अय्यूब ३–३१) तक़, अय्यूब अपने ग़म में डूबा रहता है और अपनी मायूसी, शिक़ायतें, और अपनी ख़ुद की वफ़ादारी गिनाता है। वह यह भी कहता हैं कि क़ाश जिस दिन वह पैदा हुआ था, वह उसी दिन ही मर जाता (आयूब ३:३–७ HINOVBSI)।
भला उसे कौन क़ुसूरवार ठहरा सकता है?
अग़र किसी को शिक़ायत करने का हक़ होता, तो वह अय्यूब ही था।
इन आध्यायों में लगभग हर आयत में “मैं”, “मुझे”, “मेरा” जैसे लफ़्ज़ आते हैं। अय्यूब अपनी तकलीफ़ और ख़ुद-तरसी में पूरी तरह डूब चुका था।
लेकिन फ़िर, अध्याय ३८ से, ख़ुदा उससे हमक़लाम होता हैं और अय्यूब को अपनी महिमा, क़ुदरत और ताक़त याद दिलाता है। ख़ुदा अय्यूब से पूछता है, ‘मेरे मुक़ाबले में तू कौन हैं?”
अचानक अय्यूब का नज़रिया बदल जाता है। उसकी आवाज़ नरम हो जाती है और उसके दिल में विनम्रता का दरिया बहने लगता है:
*“मैं लायक नहीं हूँ, मैं तुझे क्या जवाब दूँ? मैं मेरा हाथ मेरे मुँह पर रखता हूँ। एक बार बोला, पर जवाब न दे सका; दो बार बोला, पर अब और नहीं कहूँगा।” — अय्यूब ४०:४–५ HINOVBSI
और फ़िर वह कहता हैं:
*“मुझे मालूम है कि तू सब कुछ कर सकता हैं; और तेरी कोई मर्ज़ी नाक़ाम नहीं हो सकती।” — अय्यूब ४२:२ HINOVBSI
अय्यूब की नज़रें अब अपनी तकलीफ़ और ख़ुद-तरसी से हटकर, ख़ुदा पर टिक जाती हैं।
ख़ुदा आपकी ख़ुद-तरसी संभाल सकता है। अपनी शिक़ायतें और अपने ग़मों को आप सीधे उसके सामने पेश कर सकते हैं और वह आपसे ज़रूर मुलाक़ात करेगा। तब तक़ ख़ुदा की तारीफ़ में मग्न हो जाए। 😉