तू ही मंज़िल, तू रास्ता भी हैं।
कभी-कभी लोग कहते हैं कि सबसे बेहतरीन गाने, दर्द से जन्म लेते हैं और बे-शक़ यह मेरा लिखा हुआ गीत “तुमसा” के लिए सच है। आप इसे यहाँ सुन सकते हैं।
साल २०१२, मेरी ज़िंदगी के सबसे मुश्क़िल और कसौटी भरे सालों में से एक था। मुश्किलें मानो थमने का नाम ही नहीं ले रही थीं और एक के बाद एक आँधियाँ उठती चली गईं। जिन रिश्तों को मैं दिल से थामे हुए था, वे बिखर गए, और यहाँ तक कि मेरी अपनी टीम भी मुझसे दूर हो गई। उस समय येशुआ मिनिस्ट्रीज़ अपने शिखर पर थी, और मेरे लिखे गीत पहले से कहीं ज़्यादा लोगों के दिलों में बस चुके थे। फ़िर भी, मुझे पीछे हटना पड़ा, सब कुछ रोक देना पड़ा, और मंच की चकाचौंध से दूर होकर ख़ामोशी को अपना साथी बनाना पड़ा।
अपनी ज़िंदगी में मैंने कभी ख़ुद को इतना ठुकराया हुआ, इतना अकेला और इतना धोखा खाया हुआ महसूस नहीं किया था। मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं था और मैं समझ नहीं पा रहा था कि ख़ुदा ने यह सब होने क्यों दिया। आख़िरकार, मैंने तो सिर्फ़ उसकी बुलाहट के प्रति आज्ञाकारिता ही दिखाई थी। मेरे कई पासबान दोस्त मेरे साथ खड़े थे, मुझे संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरी परिस्थितियाँ ज्यों की त्यों बनी रहीं; दर्द कम नहीं हुआ, और अँधेरा और गहरा होता चला गया।
यही वह पल था, जब सारी इंसानी मदद असफ़ल हो गई थी, कि मैंने सीख लिया कि पूरी तरह, संपूर्ण रीती से और पुरे दिल से ख़ुदा पर भरोसा किया जाए। यह आयत मेरी ज़िंदगी की रहनुमाई बन गई:
*“आसमान में, तेरे सिवा मेरा और कौन है? और ज़मीन पर भी, तेरे अलावा मेरी कोई ख़्वाहिश नहीं। मेरा जिस्म और मेरा दिल चाहे कमज़ोर पड़ जाए, लेकिन ख़ुदा मेरे दिल की ताक़त है और हमेशा के लिए मेरा हिस्सा।” – भजन संहिता ७३:२५-२६ HINOVBSI
इस आयत से, मेरे दिल में एक नया गीत जन्मा और जिसके अल्फ़ाज़ हैं: “तुमसा कोई नहींतुमसा कहीं नहीं, अब है पूरा यक़ीन, तुमसा कोई नहीं।”
मुझे पूरा यक़ीन था कि यीशु मसीह के पास मेरी हर समस्या का समाधान है। मैं पूरे दिल और जान से उससे दुआ करता रहा कि वह मुझे बचाए, मुझे छुटकारा दे और मेरी ज़िंदगी को फ़िर से बहाल करे। लेकिन उस लंबे और दर्द भरे सफ़र में, उसने मुझे संभाला। वह हर क़दम पर मेरी ढाढ़स, मेरी ताक़त और मेरा सहारा बना रहा। वही एहसास, वही सच्चाई, धीरे-धीरे एक गीत की पंक्तियों में ढल गई: “तु ही मंज़िल, तु रास्ता भी है।”
मैं शायद यह नहीं जानता हूँ कि आज आप ज़िंदगी के किस दौर से गुज़र रहे हैं, लेकिन मैं इतना जानता हूँ कि क़दम-दर-क़दम, यीशु मसीह आपके साथ हैं। (भजन संहिता १६:८ HINOVBSI)
और यह सच हैं कि, सारे जहाँ में यीशु मसीह जैसा कोई भी नहीं हैं!!