जैसे हिरनी पानी के लिए, प्यासा मैं भी हूँ तेरे लिए।
पिछले २० सालों में, मैंने अपने लिखे कई पुराने गीतों को नए अंदाज़ में दोबारा रिलीज़ किया है, ज़्यादातर इसलिए क्योंकि लोग आज भी उन्हें गुनगुनाना पसंद करते हैं, हालाँकि उनका संगीत वक़्त के साथ थोड़ा पुराना महसूस होने लगा था।
फ़िर भी, एक ऐसा गीत था जिसे मैंने सिर्फ़ उसके संगीत और अंदाज़ के लिए ही नहीं, बल्कि इसलिए दोबारा रचा क्योंकि उसके अल्फ़ाज़ों को लेकर, मेरे दिल में बदलाव आ गया था। यह वो गाना हैं जिसे मैंने और मेरे छोटे भाई ने कई साल पहले, साथ मिलकर लिखे थे।
ख़ुदा का उपासक होने के नाते, शुरुआत से ही एक साधारण उसूल मेरी रहनुमाई करता रहा है: यह सब यीशु मसीह के बारे में है।
मेरे पिता कहा करते थे, “जैसे चिकन के बिना चिकन करी सिर्फ़ एक साधारण करी रह जाती है, उसी तरह उस देश में जहाँ करोड़ों देवी-देवताओं के नाम लिए जाते हैं, अग़र इबादत के गीतों में यीशु मसीह के नाम का ज़िक्र न हो, तो वे गीत सिर्फ़ गीत ही रह जाते हैं।’ यीशु मसीह के नाम के बिना गाए गए गीत किसी के लिए भी हो सकते हैं। ऐसे गीत सुनने में भले ही सुंदर लगें, सुरों से सजे हों, लेकिन उनमें एक स्पष्ट पहचान और आत्मा की गहराई नहीं होती। वे दिल को छू तो सकते हैं, पर उसे दिशा नहीं दे पाते।
अब, मैं ऐसे गीतों के ख़िलाफ़ नहीं हूँ। हकीक़त में, ऐसे पल भी होते हैं जब मैं बॉलीवुड के अर्थपूर्ण गीतों को ख़ुदा की तारीफ़ में गाता हूँ (हाँ, इससे कुछ विवाद भी हुआ था 🤪)। लेकिन जब बात मेरे लिखे गीतों की आती है, तो मैं चाहता हूँ कि इसमें कोई शक़ न रहे: ये गीत सिर्फ़ यीशु मसीह की इबादत के लिए बनाए गए हैं, उसे इज़्ज़त देने और उसके नाम को ऊँचा उठाने के लिए।
हालाँकि, एक गीत था जिसे मैंने रिलीज़ किया था, जो सुनने के लिए सुंदर था, लेकिन उसमें यीशु मसीह या ख़ुदा के नाम का ज़िक्र नहीं था। मैं गीत “ले चल मुझे” की बात कर रहा हूँ।
इसलिए, मैंने इसे कभी कॉन्सर्ट में नहीं गाया। यह सही नहीं लगता था।
तो मैंने फ़िर से सोच-विचार किया और उस मुखड़ें पर ग़ौर किया जिस पर यह गीत आधारित है:
*“जैसे हिरनी पानी के लिए, प्यासा मैं भी हूँ तेरे लिए, ऐ ख़ुदा।” – भजन ४२:१ HINOVBSI
मुझ पर यह बात गहराई से खुलकर मालुम हुई, कि सिर्फ़ मैं ही ख़ुदा को नहीं चाहता, बल्कि वह भी मुझे चाहता है। वह मेरे दिल की तलाश में आसमान को छोड़कर, ज़मीन पर उतर आया।
इसलिए, मैंने गीत में यीशु मसीह का नाम जोड़ा और अल्फ़ाज़ को इस तरह से लिखा ताकि ध्यान मेरी बेबसी से हटकर उसकी उमड़ती हुई और क़ुर्बानी से भरी मोहब्बत पर आ जाए।
इसी नतीजे पर, इस मूल गीत के रिलीज़ होने के ९ साल बाद, हमने ले चल मुझे २.० रिलीज़ किया।
इसे ज़रूर सुने और ख़ुद फ़ैसला करें।😉