हर चीज़ पर अपना क़बू छोड़ करे, ख़ुदा पर यक़ीन करे।
आप अपने-आपको एक बच्च्चे के रूप में कैसे बयान करतें हैं?
सच कहूँ, तो मुझे नहीं पता कि मैं अपने-आप को कैसे बयान करूँगी, लेकिन अग़र आप मेरी माँ से पूछें, तो वह कहेंगी कि मैं बहुत प्यारी थी, लेकिन साथ ही संभालने में काफ़ी मुश्किल भी! 😅
निर्गमन २:२ HNOVBSI में मूसा का ज़िक्र एक “ख़ूबसूरत” बच्चे के तौर पर किया है - लेकिन क्या आपको पता हैं कि निर्गमन की क़िताब किसने लिखी हैं?? वो शक़्स मूसा था! उसने ख़ुद को ख़ूबसूरत बच्चा कहा यह बात मुझे हमेशा बहुत मज़ेदार लगती है। 🤭
मूसा का जन्म उस दौर में हुआ जब फ़िरौन ने इस्राएलियों की बग़ावत के डर से यह बेरहम फ़रमान जारी किया था कि इस्राएल में पैदा होने वाले हर नवजात लड़के को मौत के घाट उतार दिया जाए।
आप में से बहुत से लोग जानते हैं कि लगभग एक साल पहले, कॅमरॉन और मैंने अपने बेटे, ज़ैक को खो दिया था। तो मैं समझ सकती हूँ कि उन माताओं का दर्द कितना गहरा रहा होगा, जब उनकी आँखों के सामने, उनके बच्चों को मार दिया गया था।
मूसा की माँ, योखबेद को इस आने वाले दर्दनाक़ पल का पूरा एहसास था और उसने अपने बेटे को जितने दिनों तक मुमक़िन था, छुपा कर रखा था (निर्गमन २:२–३ HNOVBSI, इब्रानियों ११:२३ HNOVBSI).
जब वह उसे और ज़्यादा देर तक छुपा नहीं सकीं, तो उसने एक ऐसा फ़ैसला लिया जो जितना बहादुर था, उतना ही जानलेवा भी। उसने अपने तीन महीने के मासूम बच्चे को सरकंडों की एक मज़बूत टोकरी में रखा और उसे नील नदी के किनारे झाड़ियों के बीच धीरे से छोड़ दिया। शायद उसके दिल में यह उम्मीद थी कि फ़िरौन की बेटी, जो अक्सर वहीं स्नान करने आती थी, उस बच्चे पर नज़र डाले और शायद यही उसका इरादा भी था। मग़र यह क़दम बेहद ख़तरनाक था, क्योंकि नील नदी ख़तरनाक मगरमच्छों के लिए मशहूर थी, और वह जगह किसी नन्हे बच्चे के लिए बिल्कुल भी महफ़ूज़ नहीं थी।
इस कहानी का अंजाम बेहद ख़ूबसूरत है क्योंकि नील नदी पर बहती उस टोकरी में फ़िरौन की बेटी को वही नन्हा बच्चा, मूसा, मिल जाता है। लेकिन मेरी सोच अब भी उसी जगह अटकी हुई है: आख़िर योखबेद कितनी सहमी, कितनी मजबूर और कितनी टूटी हुई होंगी, जो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी ख़तरनाक राह पर छोड़ने जैसा क़दम उठाना पड़ा।
अपने बेटे को, अपने अनमोल ख़ज़ाने को टोकरी में रखकर नील नदी की लहरों पर छोड़ते हुए, उसने हर नतीजे पर अपना क़ाबू छोड़ दिया और पूरी तरह से ख़ुदा की रहमत और इरादों पर यक़ीन कर लिया।
ज़िंदगी में हमें भी ऐसा रवैया अपनाना चाहिए और बिलकुल योखबेद जैसे करना चाहिए।
क्या आपकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे हालात हैं रिश्ते, नौकरी, या कोई और हालात जो आपको बेहद बेबस और महसूस करते है? क्या आपको लगता है कि आप अब और ज़्यादा संभाल नहीं पाएँगे?
योखबेद की तरह, आप उसे ख़ुदा के हवाले कर दे। सारे हालातों पर क़ाबू छोड़कर, ख़ुदा के हाथों में सौंप दे।