जहाँ भी तुम जाओगे, तुम्हारा ख़ुदावंद ख़ुदा तुम्हारे साथ रहेगा।
भारत में, जहाँ तक मुझे मालूम है, बच्चे के जन्म के वक़्त दाई का होना बहुत आम बात नहीं है। ज़्यादातर महिलाएँ अस्पतालों में, डॉक्टर और नर्स की मदद से बच्चे को जन्म देती हैं।
लेकिन मुझे आज भी ज़ैक के जन्म का पल याद है। उस वक़्त कमरे में मौजूद दाई ने कमाल का काम किया। वह बिल्कुल ख़ामोश और शांत थी, हर चीज़ मुझे नर्मी से समझाती रही और बार-बार मेरी दिल की धड़कन और बच्चे की धड़कन की जाँच करती रही, ताकि हर चीज़ ठीक रहे।
बाइबल में भी दाई का ज़िक्र, मूसा की कहानी में मिलता है। शिप्रा और पूआ, यहूदी इब्रानिया थीं जो मिस्र में इस्राईली लोगों की मदद करती थी। उनके नामों का मतलब है “ख़ूबसूरत” और “नूरानी”, और यह खूबियाँ उनके किरदार में झलकती थीं।
निर्गमन १:१५-१६ HNOVBSI में फ़िरौन ने उन्हें हुक़्म दिया कि वे नवजात लड़कों का क़त्ल करें, क्योंकि उसे ग़ुलाम बने ईब्रानी लोगों की बग़ावत का डर था।
आख़िर कौन सी दाई ऐसा कर सकती है? उनकी सेवा तो बच्चों को जन्म देने के लिए मदद करना था, उन्हें मारना नहीं! लेकिन दाइयों ने ख़ुदा का ख़ौफ़ रखा और मिस्र के राजा के हुक़्म के मुताबिक़ काम नहीं किया; उन्होंने लड़कों को ज़िंदा रहने दिया (निर्गमन १:१७ HNOVBSI).
शिप्रा और पूआ ने बहादुरी से फ़िरौन के ख़िलाफ़ खड़े रहे। क्योंकि उन्होंने ख़ुदा को, उस राजा से ज़्यादा अहमियत दी, इसलिए ख़ुदा ने उन्हें बरक़त दी और उन्हें अपने ख़ुद के परिवार दिलाए (आयत २१)।
बाइबल में अक़्सर ताक़त और हिम्मत के ख़ूबियों को रोशन किया जाता हैं, जैसे की इस आयत में — यहोशू १:९ HNOVBSI:
*“क्या मैंने तुझे यह हुक़्म नहीं दिया हैं? दबंग और दलेर रहो। डरो मत और मायूस न हो, क्योंकि जहाँ भी तू जाएगा, तेरा ख़ुदा, तेरे साथ रहेगा।”
शिप्रा और पूआ, ताक़त और हिम्मत के बेमिसाल उदारण हैं। फ़िरौन के हुक़्म का इनकार करना मतलब मौत को दावत देना था, लेकिन उन्हें उस इंसानी फ़िरौन राजा के डर से ज़्यादा ख़ुदा का आदरयुक्त खौफ था।
क्या आपकी ज़िंदगी में भी ऐसी जगहें हैं जहाँ आपको शिप्रा और पूआ जैसी हिम्मत या ताक़त की ज़रूरत है? दाऊद राजा के ये अल्फ़ाज़ याद रखें:
*“ख़ुदा में, जिसके क़लाम की मैं तारीफ़ करता हूँ,उसी ख़ुदा पर मेरा पुर-यक़ीन है और मैं नहीं डरता हूँ।आख़िर इंसान मेरा क्या बिगाड़ सकता है?” — भजन संहिता ५६:४ HNOVBSI