क़ाबिले-तारीफ़ हैं वह महिला, जो ख़ुदा का आदरयुक्त ख़ौफ़ रखती है।
आपकी ज़िंदगी में सबसे अहम महिलाएँ कौन हैं?
मुझे यक़ीन है कि, हर पति अपनी पत्नी को और बच्चे अपने माँ को इस मामले में नंबर १ पर रखेंगे। 😇
मेरी ज़िंदगी में, मेरी सूचि में सबसे ऊपर मेरी माँ और मेरी बड़ी बहन होंगी, उसके बाद कॅमरॉन के परिवार की महिलाएँ, मेरी सहेलियाँ, रूहानी माँएँ और शायद कोई पुरानी शिक्षक या पहली बॉस भी।
मेरा अंदाज़ा है कि आपकी सूचि भी कुछ वैसी ही होगी। लेक़िन मुझे शक़ है कि उस सूचि में वे दाइयाँ, या अस्पताल के डॉक्टर्स जिन्होंने आपके जन्म में मदद की, या कोई राजकुमारी शामिल नहीं होंगी, है ना? 🤔
फ़िर भी, मूसा की ज़िंदगी की सबसे अहम महिलाओं की सूचि में वे सब शामिल थी!
असल में, मूसा की पूरी कहानी में कई महिलाओं ने बेहद अहम किरदार निभाए हैं - सबसे पहले उसकी माँ, फ़िर दाई, उसकी बहन, फ़िरौन की बेटी और आख़िर में उसकी पत्नी।
मुझे यह बात बेहद पसंद है कि मूसा की कहानी में, जो हमारे ईमान के सबसे बड़े अगुवाओं में से एक हैं और कई लोगों के मुताबिक़, यीशु मसीह के बाद, बाइबल के सबसे अहम अगुवा के रूप में, महिलाएँ सबसे अहम किरदार निभाती हैं।
बाइबल में और शायद पुरे इतिहास में, कोई और शख़्स नहीं जिसकी ज़िंदगी को इतनी बार महिलाओं ने बचाया हो, जितनी बार मूसा की बचाई गई।
इस रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिन है और इसी वजह से मैं इस हफ़्ते, मूसा की ज़िंदगी की महिलाओं पर ग़ौर करना चाहती हूँ। वे सारी महिलाएँ वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ हैं।
क्यों ना आज आप अपनी ज़िंदगी पर नज़र डालें और एक पल ठहरकर सोचें: आपकी ज़िंदगी की सबसे अहम महिलाएँ कौन हैं?
बाइबल कहती है:
*“मोहब्बत-भरी अदाएँ फ़रेबी होती हैं, और ख़ूबसूरती चंद दिनों की मेहमान है, लेकिन क़ाबिले-तारीफ़ हैं वह महिला, जो ख़ुदा का आदरयुक्त ख़ौफ़ रखती है। उसके हाथों ने जो कुछ मेहनत की है, उसके लिए उसकी इज़्ज़त करे और उसके कामों को शहर के दरवाज़े पर तारीफ़ दिलाएँ।”— नीतिवचन ३१:३०–३१ HNOVBSI
आज ही अपनी सूची में शामिल महिलाओं की तारीफ़ और सम्मान करते हुए उन्हें एक मोहब्बत भरा संदेश भेजें। मुझे यक़ीन है कि उन्हें यह बहुत पसंद आएगा!