मैं ख़ुदा की हस्तकला हूँ।
वर्शिप वर्कशॉप शुरू करने के मेरे सबसे पसंदीदा तरीक़ों में से एक है यह पूछना: “हम …… करने के लिए बनाए गए हैं??”
और फ़िर आमतौर पर भीड़ ज़ोर से चिल्लाती है, “इबादत!”
मैं जवाब देता हूँ, “ग़लत!” इफीसियों २:१० HINOVBSI में लिखा है:
*“क्योंकि हम उसकी हस्तकला हैं, यीशु मसीह में अच्छे कामों के लिए बनाए गए हैं, वो अच्छे काम जिन्हें ख़ुदा ने पहले से ही तय किया था, ताकि हम उसमें चलते रहें।”
मेरे इस जवाब से सभी चौंक जाते हैं और फ़िर मैं उन्हें एक इबादत-भरी ज़िंदगी गुज़ारने का अंदाज़ समझाता हूँ।
मैं उस सवाल से इसलिए शुरुआत करता हूँ क्योंकि मैं उन कामों की अहमियत पर ज़ोर दे सकूँ जिनके लिए ख़ुदा ने हमें बनाया है।
अग़र यहाँ ज़मीन पर हमारा एक ही मक़सद महज़ इबादत करना होता, तो यह ज़्यादा समझदारी होती कि ख़ुदा हमें सीधे जन्नत में ले जाता, जहाँ हम बिना किसी ध्यान भटकाए, पूरी तरह से उसकी इबादत कर सकते।
लेकिन हमें ऐसे नहीं बनाया हैं जहाँ हम महज़ इबादत में मग्न रहे और अपने आस-पास की दुनिया से ओझल हो जाएँ। हम यहाँ इस धरती पर इसलिए हैं कि हम नेकी के काम करें।
आप पूछ सकते हैं, “कौन से काम?” यीशु मसीह ने इसका जवाब कुछ ऐसे दिया, यूहन्ना १४:१२ HINOVBSI:
*“मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो मुझ पर यक़ीन करता है वह वही काम करेगा जो मैं कर रहा हूँ, और इससे भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जा रहा हूँ।”
यहाँ यीशु मसीह के किए गए कामों के कुछ उदाहरण हैं:
१. बीमारों को शिफ़ा दी (मत्ती ४:२३)
२. दुष्ट आत्माओं को निकाला (मत्ती ८:१६)
३. भूखों को खाना खिलाया (मत्ती १५:३२-३७)
४. गरीबों की सेवा की (लूका ४:१८)
५. सुसमाचार फ़ैलाया (मत्ती ४:२३)
६. बाइबल की शिक्षा दी (मत्ती ४:२३)
७. चेलों को तैयार किया (मत्ती ४:१८-२०)
यह कोई शर्तों की सूची नहीं है जिसे पूरा करना ज़रूरी है ताकि आप ख़ुद को मसीही कह सकें, बल्कि यह एक ख़ूबसूरत वादा है कि आपकी ज़िंदगी यहाँ धरती पर मक़सद से भरपूर रहे, वही मक़सद जो यीशु मसीह का था।