मैं एक नई सृष्टि हूँ।
आप ख़ुद को कैसे परिभाषित करते हैं?
अग़र हम ख़ुशक़िस्मत हैं, तो लोग हमें हमारे सबसे बड़े क़ामयाबियों या सबसे बेहतरीन गुणों से परिभाषित करते हैं। हालातों के हिसाब से, मुझे अक़्सर इस तरह पेश किया जाता है:
- “एक मशहूर हिंदी वर्शिप लीडर”
- “वो शख़्स जिसने ‘हम गाये होसान्ना’ गीत लिखा”
- “जेनी का पति”
लेकिन कई दफ़ा, ये ज़माना हमें हमारी सबसे बड़े संघर्षों, असफ़लताओं या सबसे ना-पसंद ख़ूबी से पहचानता है। अक़्सर आपने ऐसा सुना होगा:
- “छोटा या नाटा आदमी”
- “वो लड़की जिसकी शादी नहीं हो रही हैं”
- “वो शरारती बच्चा”
लेक़िन ख़ुदा बिल्कुल अलग़ तरीका अपनाता हैं। वह हमारे गुज़रे हुए कल को नहीं देखता और न ही हमें हमारे अपने कामों या क़ाबिलियत से परिभाषित करता है। बल्कि, वह यीशु मसीह को और हम जो यीशु मसीह मे हैं, उसे देखता है।
हम वह नहीं हैं जो हम पहले थे, लेकिन अब हम एक नई सृष्टि हैं! जब हम यीशु मसीह को अपनाते हैं, तो हम पूरी तरह से नई रचना बन जाते हैं।
*”इसलिए, अग़र कोई यीशु मसीह में है, तो वह एक नई सृष्टि है: पुराना बीत चुका है, देखो, नया आ गया है!” – २ कुरिन्थियों ५:१७ HINOVBSI
यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आपको मेहनत करके हासिल करना पड़े या अच्छे बर्ताव से कमाना पड़े। नई सृष्टि बनना उतना ही आसान है जितना अपनी पुरानी ख़ुदी को छोड़ देना और अपनी नई ख़ुदी को अपनाना।
*”आपको सिखाया गया था कि ख़ुद की पुरानी ज़िंदगी के चाल-चलन को छोड़ दे, उस पुरानी ख़ुदी को उतार दे जो अपनी फ़रेबी ख़्वाहिशों से बिगड़ती जा रही है; और अपने मन के स्वभाव में नए बन जाए; और नई ख़ुदी को पहन ले, जो ख़ुदा के रूप में, सच्ची धार्मिकता और पाक़ीज़गी के लिए पैदा की गई है।” – इफिसियों ४:२२-२४ HINOVBSI
जब भी आप ख़ुद को पुराने तरीकों, ग़ुनाहों या बुरी लतों की ज़जीरों में फँसा हुआ पाएँ, यीशु मसीह के पास दुआ में आकर यह कहें, “ऐ ख़ुदा, मैं तेरे सामने हाज़िर हूँ, क्या तू मुझे फ़िर से नया बना देगा? आमीन।”