मैं अज़ीम और ख़ूबसूरती से रचाया गया हूँ।
आपकी पसंदीदा ख़ासियत क्या है? और अग़र आप अपने शरीर में कोई चीज़ बदल सकते, तो वह क्या चीज़ होती?
मेरे लिए, मेरी आँखें मेरी ख़ासियत हैं। शायद इसलिए जेनी उन्हें इतनी मोहब्बत करती है। और अग़र मैं कुछ बदल सकता, तो शायद अपनी ऊँचाई में कुछ इंच जोड़ता, जिससे एक लंबी, डच पत्नी के साथ ज़िंदगी थोड़ी आसान हो जाती। 🤪
आजकल हमारी शक्ल-सूरत को बदलने के अनगिनत तरीके मौजूद हैं। मामूली बदलाव—जैसे कपड़े, हेयरस्टाइल और मेक-अप—से लेकर बड़े और गहरे बदलावों तक, जैसे प्लास्टिक सर्जरी या आज कल के दौर में, लिंग परिवर्तन तक के ऑपरेशन। 🤯
मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि इंसान अच्छा दिखना चाहे, अपने शरीर का ख़याल रखे, और अपने बाहरी रूप को सँवारने की कोशिश करे — इसमें कोई बुराई नहीं है।
लेकिन अपने आप को हर हाल में बदल देने की ख़्वाहिश रखना और जैसे ख़ुदा ने हमें बनाया है उसे दिल से स्वीकार करना — इन दोनों के बीच एक बहुत नाज़ुक और अहम लकीर होती है।
ख़ुदा से कोई ग़लती नहीं होती हैं। चाहे आप दुनिया की नज़रों में “ख़ूबसूरत” दिखें या न दिखें - ख़ुदा ने आपको उसके रूप में बनाया।
*“क्योंकि तूने मेरी अंदरूनी हिस्से को गहराई से बनाया; तूने मुझे मेरी माँ की कोख़ में बुना हैं। मैं तेरी इबादत करता हूँ क्योंकि मैं अज़ीम और ख़ूबसूरती से रचाया गया हूँ; तेरे काम बेमिसाल हैं, मैं यह अच्छी तरह जानता हूँ।” – भजन संहिता १३९:१३-१४ HINOVBSI
कभी–कभी आईने में दिखने वाले अपने ही अक्स के ज़रिये, शैतान आपको यह यक़ीन दिलाने की कोशिश करता है कि आपकी सूरत में कई ख़ामियाँ हैं। नकारात्मक ख़यालात, हीनभावना और आत्म–दोष उसके हथकंडे हैं—ताकि वह आपके दिल में यह शक़ बो सके कि आप ख़ुदा की बेहतरीन और मुक़म्मल रचना नहीं हैं।
आप महज़ अज़ीम और ख़ूबसूरती से नहीं बने हैं, बल्कि आप सबसे बेहतरीन रूप में भी बने हैं:
*“ख़ुदा ने इंसान को अपने रूप में रचाया हैं, उसने उन्हें अपनी सूरत में बनाया हैं; नर और नारी दोनों को सँवारा हैं।” – उत्पत्ति १:२७ HINOVBSI
अपनी शक्ल-सूरत को लेकर फ़िक्रमंद होने के बजाय अपनी नज़र उस पर डाले, जिसके रूप में आप बनाए गए हैं।