तेरे ईमान ने तुझे चंगा किया है।
हम इस सीरीज़ ‘यीशु मसीह के ७ सवाल, जिनका जवाब हमें देना है’ के आख़री दिन पर पहुँच चुके हैं।
आज के सवाल का जवाब इतना आसान और साफ़ हैं कि यह सोचने पर मजबूर करता हैं कि यीशु मसीह ने ऐसा सवाल पूछा ही क्यों था।
जब यीशु मसीह यरीहो से बाहर निकल रहा था, तो एक अंधा आदमी, जिसका नाम बरतिमाई था, उसे पुकारता है: “दाऊद के बेटे, मुझ पर रहम कर।” (मरकुस १०:४८ HINOVBSI) जब उसे यीशु मसीह के सामने लाया गया, तो उसने पूछा: “तु क्या चाहता हैं कि मैं तेरे लिए क्या करूँ?”
किसी को इस बात से हैरानी नहीं होगी, जब बरतिमाई जवाब देता है: “मैं देखना चाहता हूँ।” (मरकुस १०:५१ HINOVBSI) ज़ाहिर सी बात है! एक अंधा इंसान अपनी नज़र के अलावा और क्या चाहेगा? 🤦🏼♀️
लेकिन अग़र ज़रा गहराई से सोचें, तो उसका जवाब इतना सीधा या साधारण नहीं था। बरतिमाई को अपनी नज़र वापस पाने के लिए पहले यह पूरा भरोसा रखना पड़ा कि यीशु मसीह सचमुच यह चमत्कार कर सकता हैं। उसके लफ़्ज़ों ने न सिर्फ़ उसकी सबसे बड़ी दिली ख़्वाहिश को उजागर किया, बल्कि उसके दिल में छुपे उस गहरे और अटल ईमान को भी सामने ला दिया।
मुझे यक़ीन है, बरतिमाई ने सड़क पर किसी और से कभी यह नहीं कहा होगा, मेरी आँखें लौटा दो। वह तो एक भिखारी था जो लोगों से सिर्फ़ पैसे माँगता था और वे लोग भी उसे उतना ही दे सकते थे - कुछ पैसे। लेकिन यीशु मसीह ने उसे कई ज़्यादा अहम चीज़ अता की।
आज यीशु मसीह आपसे भी यही सवाल पूछता है: आप क्या चाहते है की, मैं आपके लिए क्या करूँ? आपकी सबसे ग़हरी ख़्वाहिश क्या है? और क्या आप यक़ीन रखतें हैं कि यीशु मसीह उसे पूरा कर सकता है?