हर एक ख़याल को क़ाबू में करके मसीह के फ़रमाँ-बरदार बने।
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप अचानक किसी ख़याल में ऐसे खो जाएँ कि जब होश आए तो ख़ुद से पूछें— ‘मैं इन ख़यालों में कैसे उलझ गई?’
सच कहा जाए तो हमारा दिमाग़ बड़ा ही अद्भुत और रहस्यमय है। यह कैसे भटकता है, ख़याल कहाँ से आते हैं—यह आज तक कोई पूरी तरह नहीं समझ पाया। न कोई इंसान, न कोई वैज्ञानिक। हमारा मन वाक़ई रोमांचक बातों से भरा एक रहस्य है।
फ़िर भी, बाइबल हमें हमारे ख़यालों की हिफ़ाज़त करने लिए उत्साहित करती है (नीतिवचन ४:२३ HINOVBSI) और हमें अपने दिमाग़ को सही चीज़ों की ओर मोड़ने के लिए कहती है:
*“आख़िर में, भाइयों और बहनों, जो भी सत्य है, नेक है, सही है, पाक़ है, मोहब्बत से भरा है, क़ाबिल-ए-तारीफ़ है, बेहतरीन और उम्दा है, उन्हीं पर अपने ख़यालों को ठहराइए।” – फिलिप्पियों ४:८ HINOVBSI
जब फ़रीसी लोग यीशु मसीह के शिफ़ा और माफ़ी के कामों से ख़फ़ा हुए, तब यीशु ने उनके मन की बातें जानकर यह सवाल पूछा: “आपके दिलों में बुरे ख़याल क्यों आते हैं?” – मत्ती ९:४ HINOVBSI
अपने दिल का हाल जानने के लिए, आप भी यह सवाल अपने आपसे पूछ सकतें हैं। क्या आपके ज़हन में ऐसे कोई बुरे ख़यालात हैं जिन्हें आप बढ़ावा दे रहे हैं?
शायद आपके दिल में किसी दोस्त के प्रति जलन है? या शायद किसी ने आपको चोट पहुँचाई हैं और आप बदला चाहतें हैं? या कोई ऐसा इंसान है जिसके बारे में आप वासना के ख़यालात रखतें हैं?ऐसे ख़यालों को अपने ज़हन में राज करने न दे। पौलुस हमें यह बताता हैं कि:
*“हमे हर बहस और हर घमंड को तोड़ देना हैं, जो ख़ुदा की सच्चाई के ख़िलाफ़ उठता है। हर एक ख़याल को क़ाबू में करके मसीह के फ़रमाँ-बरदार बनना हैं।” – २ कुरिन्थियों १०:५ HINOVBSI