क़ामिल मोहब्बत हर डर को बेदख़ल करती है।
मुझे बहुत आसानी से डर लग जाता है और जब डर लगता है तो मैं अक़्सर उछलकर खड़ी हो जाती हूँ या ज़ोर से चिल्ला देती हूँ। कॅमरॉन को इतनी आसानी से डर नहीं लगता, वह अचानक से चौंकता नहीं। कई बार मुझे एहसास ही नहीं होता कि वह दरवाज़े के पीछे खड़ा है, या मुझे उसके क़दमों की आवाज़ सुनाई नहीं देती और अचानक जब वह मेरे ठीक पास आकर खड़ा हो जाता है, तो मैं घबरा जाती हूँ। वह अक़्सर मुस्क़ुराते हुए पूछता है, “तू डर क्यों जाती है? तुझे पता है ना कि मैं घर में ही हूँ?”🤷🏻♂️
यीशु मसीह ने अपने चेलों से भी एक ऐसा ही सवाल पूछा था: “आप क्यों डरते हैं?”
एक बार जब यीशु मसीह और उसके चेले नाव में सफ़र कर रहे थे और अचानक से एक बड़ा तूफ़ान आया, तब चेले डर गए और हड़बड़ा गए। यीशु मसीह ने उनसे कहा:
*“‘ऐ अल्पविश्वासियों, तुम इतना क्यों डरते हों?’ फ़िर उसने तूफ़ान और उठती लहरों को डाँटा और पूरा समंदर तुरंत ख़ामोश हो गया।” — मत्ती ८:२६ HINOVBSI
इसी तरह, तूफ़ान के बीच जब पतरस ने हिम्मत करके नाव से बाहर क़दम रखा और यीशु मसीह की ओर बढ़ने लगा, तो कुछ पलों के लिए उसका ईमान मज़बूत था। लेकिन जैसे ही उसकी नज़र तेज़ लहरों और गरजते तूफ़ान पर पड़ी, उसका भरोसा डगमगा गया—और वह डूबने लगा। तब यीशु मसीह ने उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए उसे उठाया और पूछा: “ऐ अल्पविश्वासी, तुने शक़ क्यों किया?” मत्ती १४:३१ HINOVBSI।जब यीशु मसीह पूछता हैं, “तुम इतना क्यों डरते हो?” या “तूने शक़ क्यों किया?”, तो यह कोई डाँट नहीं होती, न ही किसी नाराज़ गुरु की सख़्ती। यह एक मोहब्बत-भरा, नर्म और तसल्ली देने वाला सवाल होता है — कुछ वैसा ही जैसे कॅमरॉन मुस्क़ुराते हुए मुझसे पूछता है, “तुझे डर क्यों लगा? तुझे पता है ना कि मैं यहीं हूँ?”
उस सवाल में ताना नहीं, बल्कि तसल्ली होती है; उलाहना नहीं, बल्कि यह याद दिलाना होता है कि ‘मैं तेरे साथ हूँ — तू डर क्यों रही है?’”
यीशु मसीह ने ‘ऐ अल्पविश्वासियो’ का ज़िक्र पाँच बार किया है—लेकिन यह बात उन्होंने सिर्फ़ अपने चेलों से कही। ग़ौर करने वाली बात यह है कि यीशु ने यह शब्द कभी उन लोगों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जो शिफ़ा या मदद पाने के लिए उसके पास आते थे। उन्हें उसने कभी ‘अल्पविश्वासी’ नहीं कहा— क्योंकि उनकी तलाश में डर नहीं, बल्कि उम्मीद की लौ जल रही थी।ये अल्फ़ाज़ दरअसल एक मीठी, नर्म-सी याद दिलाहट थे: “मैं तुम्हारे साथ हूँ… इसलिए डरने की कोई वजह नहीं।”ये बातें उन्हीं चेलों से कहे गए थे जिन्होंने उसके चमत्कारों को अपनी आँखों से देखा था और उसकी मोहब्बत और वफ़ादारी को बार-बार अनुभव किया था। यीशु मसीह यह नहीं कह रहा था कि ‘मेरी हज़ूरी के लायक़ बनने के लिए, तुम्हें अज़ीम ईमान की ज़रूरत है।’यीशु मसीह की नज़र आपके डगमगाते हुए ईमान पर नहीं, बल्कि आपके दिल की तलाश पर है और वो आज आपसे भी यही कह रहा है ‘डर मत।’