• HI
    • AR Arabic
    • CS Czech
    • DE German
    • EN English
    • ES Spanish
    • FA Farsi
    • FR French
    • HI Hindi
    • HI English (India)
    • HU Hungarian
    • HY Armenian
    • ID Bahasa
    • IT Italian
    • JA Japanese
    • KO Korean
    • MG Malagasy
    • MM Burmese
    • NL Dutch
    • NL Flemish
    • NO Norwegian
    • PT Portuguese
    • RO Romanian
    • RU Russian
    • SV Swedish
    • TA Tamil
    • TH Thai
    • TL Tagalog
    • TL Taglish
    • TR Turkish
    • UK Ukrainian
    • UR Urdu
Publication date 16 फ़र. 2026

मेरी सबसे बड़ी ख़्वाहिश यही है कि मैं ख़ुदा के घर में उम्र भर रहूँ।

Publication date 16 फ़र. 2026

क्या कभी किसी ने आपसे कोई ऐसा ज़बरदस्त सवाल पूछा है जिसने आपकी ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी हो?मेरे लिए, बिना किसी शक़ के, वह लम्हा था जब कॅमरॉन एक घुटने पर बैठा और मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा —“क्या तुम मुझसे शादी करोगी?” क़रीबन दस साल बीत चुके हैं, मग़र आज भी जब उस पल को याद करती हूँ तो दिल में कुछ-कुछ होता है, वही गर्मजोशी, वही धड़कनें तेज़ होने वाली भावना जाग उठती है।  

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि— यीशु मसीह ने हमसे ऐसे सवाल पूछे हैं जो इससे भी कहीं ज़्यादा गहरे, ताक़तवर और ज़िंदगी बदल देने वाले हैं।इस हफ़्ते हम यीशु के पूछे गए सात सवालों पर मनन करेंगे— ऐसे सवाल, जिनका जवाब हर एक को देना पड़ता है… और ये जवाब हमारी ज़िंदगी की मंज़िल तय कर सकता है।

उनमें से पहला सवाल यूहन्ना १:३५-३८ HINOVBSI में है:

*”अगले दिन यूहन्ना (बपतिस्मा देनेवाला) फ़िर अपने दो चेलों के साथ वहाँ खड़ा था। जब उसने यीशु को वहाँ से गुज़रते देखा, तो पुकारकर कहा , “देखो! ख़ुदा का मेम्ना!” और जब उन दो चेलों ने यह सुना, तो वे यीशु के पीछे-पीछे चल दिए। यीशु ने मुड़कर उन्हें देखा और पूछा “तुम क्या चाहते हो?”

यह एक साधारण सा सवाल है की, “तुम क्या चाहते हो?”, लेकिन इस छोटे से सवाल के भीतर अद्भुत गहराई और बेहद गहरी अहमियत छुपी है।

जब हम रुककर, ख़ुद से ईमानदारी से पूछते हैं कि “मैं सच में अपनी ज़िंदगी में क्या चाहती हूँ?”, तो उसका जवाब अक़्सर हमें चौंका देता है। क्योंकि कई बार हमारी असल चाहतें, हमारी कही हुई उम्मीदों और रोज़मर्रा की दुआओँ से बिलकुल अलग होती हैं।

आम तौर पर, मेरी सबसे गहरी आरज़ू, अक़्सर वस्तुओं और व्यावहारिक ज़रूरतों की लंबी सूची से शुरु होती है (जैसे प्रोजेक्ट के लिए पैसों की ज़रूरत, मदद के लिए सही लोग, किसी इवेंट के लिए सही जगह, सही से योजना बनना, आदि)।

लेकिन जब मैं थोड़ी देर और ख़ुदा के साथ बैठती हूँ और गहराई से सोचती हूँ, तो अक़्सर इस बात पर आकर ठहर जाती हूँ: मैं अपनी ज़िंदगी में, सबसे ज़्यादा यीशु मसीह को चाहती हूँ।

यह वही चाह उन दो चेलों की थी, जिनसे यीशु मसीह ने यह सवाल शुरू में पूछा था। वे उसके पीछे चलना चाहते थे और उन्होंने उसके साथ पूरा दिन गुज़ारा (यूहन्ना १:३८-३९ HINOVBSI)।

राजा दाऊद ने इसे भजन सहिंता २७:४ HINOVBSI में, बहुत ख़ूबसूरती से बयान किया है:

*“मैं ख़ुदावंद से एक चीज़ मांगता हूँ, मेरी सबसे बड़ी ख़्वाहिश यही है कि मैं ख़ुदा के घर में उम्र भर रहूँ - ख़ुदा के क़ामिल कामों पर ग़ौर करू और उसके मंदिर में, उसकी हुज़ूरी में मगन रहूँ।”

आज आप क्या चाहते हैं?

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.