ख़ुदा की वफ़ादारी हमारे इमान की मज़बूती से बंधी नहीं होती।
वॅलेंटाइन दिन मुबारक़ हो! दुआ करता हूँ कि, आज आपका दिल ख़ुदा की बेपनाह मोहब्बत से भर जाए। ❤️
बचपन में हमारे घर में ज़्यादा पैसे नहीं हुआ करते थे। जब मेरे पिता ने फुल-टाइम सेवा शुरू की, और उनकी आमदनी स्थिर नहीं थी, तो एक वक़्त ऐसा आया जब घर में बिल्कुल भी खाना नहीं था। घर में एक रुपया भी नहीं बचा था, और मेरे माता-पिता ने हमें कहा: “ख़ुदा पर भरोसा रखो और दुआ करते रहो।” एक दिन गुज़र गया—हम भूखे थे। दूसरा दिन भी गुज़र गया, और फ़िर भी खाना नहीं मिला। लेकिन हमने दुआ करना जारी रखा। आख़िरकार, शाम के वक़्त दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी। जब दरवाज़ा खोला, तो बाहर गरमा-गरम चाइनीज़ खाने से भरा एक बड़ा थैला रखा था। मेरे पिता ने पड़ोसियों से पूछा कि क्या उन्होंने खाना ऑर्डर किया था और ग़लती से यह हमारे घर आ गया। हमने रेस्टॉरंट को भी फ़ोन किया, और उन्होंने बताया कि यह ऑर्डर वास्तव में हमारे पते पर किया गया था और पैसे पहले ही चुका दिए गए थे।
मज़ेदार बात यह थी कि हम कई दिनों से दिल-ओ-जान से खाने के लिए दुआ कर रहे थे, और जब खाना हमारे दरवाज़े पर मिला—तो हमारी पहली प्रतिक्रिया थी: “यह सही नहीं हो सकता!
ऐसा ही पतरस के साथ भी हुआ जब वह यूहन्ना की माँ, मरियम के घर पहुँचा, जैसा कि प्रेरितों के काम १२:१२–१६ में लिखा है। मसीही लोग पूरी लगन से पतरस की आज़ादी और उसकी ज़िंदगी के लिए दुआ कर रहे थे। लेकिन जब पतरस उनके सामने आया, तो उन्हें यक़ीन ही नहीं हुआ। वे उलझन में पड़ गए कि क्या यह सच में पतरस है या कोई फ़रिश्ता उसकी सूरत में आया है।
शुक्र है कि ख़ुदा की वफ़ादारी हमारे इमान की मज़बूती से बंधी नहीं होती।
क्या कभी आपको यक़ीन करने में मुश्किल होती है कि ख़ुदा आपकी दुआ सुन सकता है और जवाब दे सकता है? अग़र आपका जवाब ‘हाँ’ हैं, तो आप भी यीशु मसीह से मदद माँग सकते हैं।
जैसे मरकुस ९:२४ में एक पिता ने कहा:
*“ख़ुदावंद, मैं यक़ीन करता हूँ; मेरी बे-यक़ीनी में मेरी मदद कर!”