पुरानी बातों को भूले, अतीत में न रहे।
मेरे स्कूल के दिनों में, मेरे पसंदीदा विषयों में से एक, इतिहास था। मुझे बीते ज़माने की कहानियाँ सुनना बेहद पसंद था और मैं अक़सर सोचती थी—उस दौर में ज़िंदगी कैसी रही होगी। इन कहानियों की मदद से मैं बाइबल के समय और ख़ासकर उसके असली मायनों को गहराई से समझ पाती थी।
इतिहास से हम कई क़ीमती सबक़ सीख सकते है, लेकिन लगातार अतीत में झाँकते रहना अच्छा नहीं होता। फिलिप्पियों ३ में पौलुस कहता है कि उसने अपनी सारी पुरानी क़ामयाबियाँ, धार्मिकता के काम और विरासत को त्याग दिया हैं और अब वह सिर्फ़ ख़ुदा की महिमा को जानना चाहता हैं, यीशु मसीह को पहचानना चाहता हैं और उसके जैसे बनना चाहता हैं।
वह नम्रता से स्वीकारता है कि “मैं इन सब बातों में माहिर नहीं हूँ; मग़र एक बात ज़रूर करता हूँ, पीछे की बातें भूलकर, आगे की मंज़िल की तरफ़ बढ़ता हूँ।” — फिलिप्पियों ३:१३
इसी तरह का पैग़ाम बाइबल के और हिस्सों में भी झलकता है:
”पुरानी बातों को भूले, अतीत में न रहे।” — यशायाह ४३:१८
“जो कोई हल चलाते हुए पीछे देखता है, वह ख़ुदा के राज्य के काम के क़ाबिल नहीं हैं।” — लूका ९:६२
आगे बढ़ने की कुंजी, अतीत को भुलाने में ही है। शैतान हमेशा हमें हमारे गुज़रें हुए कल, ख़ासकर गुनाहों, गलतियों और असफ़लताओं की याद दिलाने की क़ोशिश करता है। दुनिया भी इंसान को उसके अतीत से पहचानती है - कभी क़ामयाबी से, तो कभी नाक़ामी से।
क्या आपके अतीत के कुछ ऐसे हिस्से हैं जिनमें आप आज भी उलझें हुए है? क्या आप बार-बार अपने दिल में पुराने दिनों को दोहराते हैं, यह सोचते हुए कि काश सब पहले जैसा होता? अपने अतीत को जाने दे और अपने आनेवाले कल को ख़ुदा के हवाले कर दे।
“इसलिए, अग़र कोई मसीह में है, वह नई सृष्टि है; बीता हुआ कल अब ख़त्म हुआ है और अब सब कुछ नया हो गया है!” — २ कुरिन्थियों ५:१७
सी. एस. लुईस के अल्फ़ाज़ों में:
“हमारे आगे बहुत बेहतर चीज़ें हैं, उन सब से भी ज़्यादा बेहतर, जिन्हें हमने पीछे छोड़ दिया है।”