तुम्हारी ख़ातिर वो ग़रीब बन गया।
क्या आपको एक्शन फ़िल्में पसंद हैं? मुझे भी ऐसी फ़िल्में देखना मज़ेदार लगता है जिनमें कहानी में रोमांच और दिलचस्प मोड़ हों। लेकिन अक्सर इन फ़िल्मों के हीरो केवल इंतकाम की आग के लिए होते हैं—उनका एक ही मक़सद होता है: जो बुरा करते हैं, उन्हें सज़ा देना।
यह एक बहुत ही इंसानी फ़ितरत और जज़्बात है और फ़िल्म बनाने वाले जानते हैं कि, उनके दर्शकों को यह बेहद पसंद आएगा - क्योंकि हर इंसान के अंदर इंसाफ़ पाने की चाह होती है। हमें लगता है कि जब कोई हमें चोट पहुँचाता है, तो हमें अपने हक़ के लिए खड़ा होना चाहिए।
लेकिन बाइबल हमें एक अलग़ सिख देती है। अपने हक़ को पाने के लिए नहीं, बल्कि उसे त्यागने के लिए।
यीशु मसीह हमारे लिए एक उत्तम मिसाल है। जब वह हमें बचाने के लिए, इंसान बनकर इस धरती पर आया, तब उसने अपने सारे हक़ और अधिकार त्याग दिए।
*“तुम अपने ख़ुदावंद यीशु मसीह के फ़ज़ल को जानते हो, कि वो बेशुमार दौलतमंद होते हुए भी तुम्हारे ख़ातिर ग़रीब बन गया, ताकि उसकी ग़रीबी से तुम रूहानी दौलत हासिल कर सके।” — २ कुरिन्थियों ८:९
ख़ुदावंद यीशु मसीह ने महज़ अपना रुतबा, अपनी बादशाहत, अपने हक़ और अधिकार नहीं त्याग दिए, पर उसके साथ ही उसने हमारे ख़ातिर अपनी जान भी क़ुर्बान कर दी。
*“मेरा पिता मुझसे इसलिए मोहब्बत करता हैं कि, मैं अपनी जान ख़ुद अपनी मर्ज़ी से क़ुर्बान करता हूँ—और फ़िर उसे वापस ले लेता हूँ। कोई उसे मुझसे छीने, ऐसा नहीं; मैं ख़ुद देता हूँ। मेरे पास उसे क़ुर्बान करने का और उसे फ़िर से ज़िंदा करने का अधिकार हैं और ये हुक़्म मुझे मेरे पिता से हासिल हुआ है।” — यूहन्ना १०:१७–१८
यीशु मसीह हमें अपने हक़ और अधिकारों को त्याग देने की राह पर चलने की दावत दे रहा है ।
*“फ़िर उसने सब से कहा, ‘जो कोई मेरा चेेला बनना चाहता है, वह अपने आप से इनक़ार करे, और हर दिन अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले।’” — लूका ९:२३
क्या आप अपने लिए इंसाफ़, इंतक़ाम, या इज़्ज़त की चाहत में मशग़ूल हैं? अब वक़्त है उन्हें त्यागने का और ज़िंदगी के मुश्क़िलों को ख़ुदा के हवाले करने का।