आसमान हो या ज़मीन—हर नाम, हर घुटना यीशु मसीह के नाम के आगे झुकेगा।
भारत में बच्चों के नाम रखने की बहुत-सी परंपराएँ हैं। जैसे मेरे परिवार में, हर बच्चे के नाम के बीच में उसके पिता का पहला नाम जोड़ा जाता है। तो मेरा नाम कॅमरॉन गॅरी मेंडीस है और इससे हर कोई जान जाता है कि मैं गॅरी मेंडीस का बेटा हूँ। मग़र दक्षिण भारत में, लोग अपने पिता के पहले नाम को ही अपने आख़री नाम के लिए इस्तेमाल करते हैं।
यह सचमुच क़माल की बात है कि अलग-अलग संस्कृतियों में नामों की परंपराएँ कितनी भिन्न होती हैं।
क्या आप जानते हैं कि किसी को ख़ुदा का एक नाम विरासत में मिला है?
मैं समझाता हूँ।
निर्गमन ३ में, मूसा ख़ुदा से उसका नाम पूछता है। तब ख़ुदा जवाब देता है:
*“मैं जो हूँ, सो हूँ। यह इस्राएलियों से कहना ‘मैं हूँ’ ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।” फ़िर ख़ुदा ने कहा, “इस्राएलियों से कहना ‘ख़ुदावंद (यहोवा), तुम्हारे पूर्वज़ों का ख़ुदा - अब्राहाम का ख़ुदा, इसहाक का ख़ुदा और याकूब का ख़ुदा - उसने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।’”
*“यह मेरा नाम क़ायम तक़ रहेगा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग मुझे इसी नाम से पुकारेंगे।” – निर्गमन ३:१४–१५
यहाँ ख़ुदा ने अपना नाम पहली बार ज़ाहिर किया - और “यहोवा” नाम को आसमान और ज़मीन दोनों में सबसे अज़ीम नाम माना गया, क्योंकि यह नाम ख़ुदा ने ख़ुद अपने लिए चुना।
हम फिलिप्पियों २:९–११ में पढ़ते हैं कि ख़ुदा ने यही नाम यीशु मसीह को दिया:
*“इसलिए ख़ुदा ने यीशु मसीह को अव्वल मुक़ाम दिया और वह नाम दिया जो हर नाम से ऊँचा है, ताकि आसमान हो या ज़मीन—हर नाम, हर घुटना यीशु मसीह के नाम के आगे झुकेगा और हर ज़ुबान इज़हार करेगी कि यीशु मसीह ही ख़ुदावंद हैं, ख़ुदा-पिता की महिमा के लिए।” – फिलिप्पियों २:९–११
यह बात यशायाह ४५:२३–२४ में भी पक्की की गई है, जहाँ ख़ुदा ख़ुद कहता है:
*“हर घुटना मेरे आगे टिकेगा, हर ज़ुबान क़ुबूल करेगी। लोग कहेंगे ‘सिर्फ़ ख़ुदावंद (यहोवा) में ही आज़ादी और ताक़त है।’”
वह दिन आने वाला है जब हर घुटना टिकेगा और आसमान के नीचे हर ज़ुबान सबसे अज़ीम नाम का इज़हार करेगी और क्या यह अद्भुत नहीं है कि हमें उसी ख़ुदा की सेवा करने का मौक़ा मिला है?