उसके भीतर से जीवित जल की नदियाँ बहेगी।
लंदन के एक चर्च के पासबान, निक्की गंबल, अक्सर अपनी कलीसिया के एक सदस्य की दिलचस्प कहानी बयान करते हैं। वह युवक एक बड़े राष्ट्रीय अख़बार के लाइब्रेरी विभाग में काम करता था—एक ऐसी जगह, जहाँ हर मशहूर शख़्सियत की पुरानी फ़ाइलें बड़े सलीके से संभालकर रखी जाती थीं। ये फ़ाइलें दो हिस्सों में बँटी हुई थीं: “ज़िंदा लोगों” की और “मरे हुए लोगों” की。
एक दिन वह युवक ‘मरे हुए लोगों’ के सेक्शन में कुछ ख़ोज रहा था कि उसकी नज़र अचानक एक मोटी, पुरानी फ़ाइल पर पड़ी। उसपर साफ़ लिखा था: “यीशु मसीह।” वह पल जैसे थम-सा गया। उसने हौले से इधर-उधर देखा—कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा। और फ़िर बिना किसी झिझक के, उसने वह फ़ाइल उठाई… और पूरे आदर और सम्मान से जाकर उसे ‘ज़िंदा लोगों’ की शेल्फ़ में रख दी。
मुझे यह कहानी बेहद प्यारी लगती है, क्योंकि यह बिल्कुल सच है: यीशु मसीह ज़िंदा हैं, और हम एक ज़िंदा ख़ुदा की सेवा करते हैं!
उसका एक नाम भी इसी सच्चाई को दर्शाता है: एल-ख़य्यिम - ज़िंदा ख़ुदा।
दाऊद, भजन संहिता ४२:१-२ में उसी ज़िंदा ख़ुदा को पुकारता है:
“जैसे हिरनी पानी के लिए तरसती है, वैसे ही मेरी रूह ए ख़ुदा, तेरे लिये तरसती है। मेरी रूह ख़ुदा के लिये, ज़िंदा ख़ुदा [एल-ख़य्यिम] के लिये प्यासी है। मैं कब ख़ुदा से रूबरू हो सकता हूँ?”
यह मुझे यूहन्ना ७:३७-३८ की याद दिलाती है, जहाँ यीशु मसीह ने ऐलान किया कि वो ही जीवित जल देने वाला हैं:
”यीशु ने खड़े होकर ऊँचे स्वर में बोला “यदि कोई प्यासा है तो मेरे पास आए और पिए। जो मुझ पर यक़ीन करता है, जैसा क़लाम में लिखा है, उसके भीतर से जीवित जल की नदियाँ बहेगी।”
हम न सिर्फ़ उस ज़िंदा ख़ुदा (एल-ख़य्यिम) की सेवा करते हैं, बल्कि वह हमारे बीच मौजूद भी है (यहोशू ३:१०)। और यीशु मसीह के ज़रिए वह हमें जीवित जल अर्थात् पवित्र आत्मा देता है, ताकि हम कभी भी फ़िर प्यासे न रहें, न इस ज़िंदगी में और न ही अनंतकाल तक (यूहन्ना ४:१३ और ७:३९)।
ऐ ख़ुदा तेरा शुक्रिया कि तू ज़िंदा हैं और हमें भी तुझमें ज़िंदा करता है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।