ख़ुदा ने तुम्हारी दुःख भरी दास्तान सुनी है।
मुझे आज भी याद है, जब जेनी और मैंने अपने बच्चे के लिए एक सही नाम ढूँढने की क़ोशिश की थी — वो कितना मुश्किल काम था! पूरी प्रेगनेंसी के दौरान, हमने शायद हज़ारों नाम देखे, और आख़िरकार ‘ज़ैक विहान मेंडिस’ नाम चुना।
लेकिन जिस वक़्त वो पैदा हुआ, मैंने उसे देखा और जेनी से कहा, ‘ये विहान नाम इस पर बिल्कुल नहीं जचता!’ हमें फ़िर से किसी और नाम की तलाश शुरू करनी पड़ी। 🙈
आख़िरकार, हमने उसके दूसरे नाम के लिए ‘चॅनन’ चुना — और हमें वह नाम बेहद पसंद आया। वो एक वाक़ई ख़ास लम्हा था, जब हमने उसके पूरे नाम ‘ज़ैक चॅनन मेंडिस’ से उसे पुकारा। 🥰
ख़ुदा का नाम उत्पत्ति १६:१३ में पहली बार पुकारा गया है:*“फ़िर हागार ने उस ख़ुदा का नाम पुकारा जो उससे हमक़लाम हुआ — ‘तू वही ख़ुदा है जो मुझे देखता है।’ और हागार ने कहा, ‘क्या मैंने सचमुच यहाँ उस ख़ुदा को देखा जो मुझे देखता है?’”
उसने एल-रोई के नाम से ख़ुदा को आवाज़ दी — जिसका मतलब हैं “वह ख़ुदा, जो देखता है।”
यह कितना ख़ूबसूरत है, है न? हम उस ख़ुदा की सेवा करते हैं जो हमें हर वक़्त देखता है! वह कितना अज़ीम है लेक़िन इतना मशग़ूल नहीं कि हमारी तरफ़ ध्यान न दे। वह हमारी हर ख़ुशी, हर आँसू देखता हैं और दिल की हर ख़ामोश दुआ सुनता है।
१ राजा १८ में, हम एलियाह और बाअल के सारे नबी की अद्भुत कहानी पढ़ते हैं, जहाँ सभी अपनी अपनी दुआ में आसमान से आग भेजने के लिए पुकारते हैं। जब बाअल के सारे नबी घंटों तक वेदी के चारों ओर नाचते रहे और अपने देवी-देवताओं को पुकारते रहे, तब दोपहर में एलियाह ने उनका मज़ाक उड़ाना शुरू किया और कहने लगा:
*“‘और ज़ोर से पुकारो!’ - ‘वह वाक़ई में कोई ईश्वर है! शायद वह कोई गहरी सोच में है, या मशग़ूल है, या कही ओर सफ़र पर है। शायद वह सो रहा है और उसे जगाना पड़े।’” – १ राजा १८:२७
वे चिल्लाते रहे, दुआ करते रहे, और अपने भगवानों का ध्यान अपनी ओर खिचने के लिए तलवारों और भालों से ख़ुद को भी काटते रहे। लेकिन कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा:
*“दोपहर बीत गई और वे अपने दीवानेपन भरे भविष्यवाणियाँ करते रहे, यहाँ तक कि शाम की बलि का वक़्त भी आ गया। लेकिन कोई जवाब नहीं आया और किसी ने ध्यान नहीं दिया।” – १ राजा १८:२९
दुनिया के देवी-देवताओं और हमारे ख़ुदा में कितना बड़ा फ़र्क़ है। हागार का ख़ुदा, हमारा ख़ुदा, एल-रोई देखने वाला ख़ुदा हैं! हागार को अपने ख़ुदा का ध्यान पाने के लिए कोई क़रतब या दिखावा नहीं करना पड़ा बल्कि ख़ुदा ख़ुद ज़ाहिर हुआ। जैसे ख़ुदा ने हागार से उसके सबसे मुश्क़िल समय में मुलाक़ात की, वैसे ही वह आज भी आपकी हर मुश्क़िल, हर आँसू देख रहा हैं और आपसे मुलाक़ात करने के लिए बेताब हैं।