हम उद्धार और पुनर्स्थापन के ख़ुदा की सेवा करते हैं।
कई लोग मानते हैं कि एक अच्छे परिवार का होना सबसे अहम है और अग़र आप एक अच्छे और मोहब्बत-भरे परिवार में पैदा हुए हैं, तो समझिए आप वाक़ई में ज़हनसीब हैं! लेकिन याद रखिए: ज़िंदगी में एक अच्छे दोस्त की मौजूदगी भी उतनी ही अहम और ज़रूरी होती हैं।
क्या आपके पास ऐसे दोस्त हैं जो आपके इतने क़रीब हैं कि आप उन्हें (लगभग) परिवार का हिस्सा मानते हैं?
दाऊद के पास भी ऐसा एक दोस्त था - उसका सबसे अच्छा दोस्त, योनातान, जो राजा शाऊल का बेटा था (१ शमूएल १८:१-४)।
दाऊद की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि, क्या उसका अपने ही परिवार से रिश्ता वाक़ई अच्छा था? ज़रा सोचिए — जब भविष्यवक्ता शमूएल, यिशै के घर नया राजा अभिषेक करने आया, तो यिशै ने अपने सभी बेटों को बुलाया, सिवाय दाऊद के। यानी, दाऊद का अपना पिता भी उसे राजा बनने क़ाबिल नहीं समझता था! (१ शमूएल १६)
बाद में जब दाऊद मैदान-ए-जंग में अपने भाइयों के लिए ज़रूरी वस्तुएँ लेकर जाता है, तो उसके भाई उस पर ग़ुस्सा करता हैं कि वो गोलियात के बारे में क्यों पूछ रहा है:
*“जब दाऊद का सबसे बड़ा भाई, एलीआब ने उसे सिपाहियों से बातें करते हुए सुना, तब उसने ग़ुस्से में जल उठाकर बोला , ‘तू यहाँ क्यों आया है? और जंगल में उन थोड़ी सी भेड़ों को, तू किसके हवाले छोड़ आया है? मै तेरे घमंड और तेरी दिल की मंशा से अच्छी तरह वाक़िफ़ हूँ; तू बस यह तमाशा देखने आया है।’” (१ शमूएल १७:२८)
लेकिन योनातान, दाऊद के लिए एक भाई से भी बढ़कर था। १ शमूएल १८:१ में लिखा है कि योनातान का मन दाऊद के मन से ऐसा जुड़ गया कि, उसने उसे अपने जैसे मोहब्बत की।
हम उद्धार और पुनर्स्थापन के ख़ुदा की सेवा करते हैं। वह हमें रिहा करता हैं और हमारी टूटी हुई ज़िंदगी को फ़िर से जोड़ता हैं - अक़सर अनपेक्षित तरीक़ों से। शायद दाऊद को अपने परिवार से वह मोहब्बत और अपनापन महसूस नहीं हुआ जो हर इंसान को मिलना चाहिए, मग़र योनातान में ख़ुदा ने उसे एक ऐसा दोस्त दिया जो सोने से भी ज़्यादा क़ीमती था।
क्या आपको भी लगता है कि आपने अपनी ज़िंदगी में कुछ खो दिया है? तो इस वादे से हिम्मत पाइए:
*“तमाम फ़ज़ल का ख़ुदा, जिसने तुम्हें यीशु मसीह में अपनी अनंतकाल की महिमा के लिए बुलाया है, थोड़े वक़्त की तकलीफ़ों के बाद तुम्हें ख़ुद पुनर्स्थापित करेगा, और तुम्हें मज़बूत, स्थिर और अटल बना देगा।”* – १ पतरस ५:१०