ख़ुदा उसी चीज़ का इस्तेमाल करता है जो हमारे हाथों में है।
आप एक चमत्कार हैं।
क्या आपने ये कहावत सुनी है, “दूसरी तरफ़ की घास हमेशा ज़्यादा हरी लगती है”? कभी-कभी हमें लगता है कि अगर हमारे पास भी दूसरों जैसी चीज़ें होतीं — उनके हुनर, मौके, पैसे या दोस्त, तो ज़िंदगी बेहतर होती। लेकिन बार-बार हम बाइबल में देखते हैं कि ख़ुदा अपनी महिमा के लिए, उसी को इस्तेमाल करता है जो हमारे हाथों में है।
इसका एक ख़ूबसूरत उदाहरण है जब दाऊद ने गोलियात से लड़ाई की (१ शमूएल १७)।
जब राजा शाऊल को यह सुनाई दिया कि आख़िरकार कोई बहादुर और मज़बूत आदमी है जो गोलियात से लड़ेगा — वह राक्षस जो इतने दिनों से इस्राएल की फ़ौज को ललकारता जा रहा था कि सब डरकर भागे (१ शमूएल १७:२४) — तब राजा शाऊल ने कहा:
*“‘जा, ख़ुदावंद तेरे साथ रहेगा।’ फ़िर शाऊल ने दाऊद को अपना कुर्ता पहनाया, एक रक्षा कवच और पीतल का हेलमेट उसके सिर पर रखा। दाऊद ने तलवार को अपने ऊपर बाँध लिया और चलने की कोशिश की, पर वह इन सब चीज़ों का आदी नहीं था। उसने कहा, ‘मैं इन सब के साथ नहीं जा सकता, क्योंकि मैं इनका आदी नहीं हूँ।’ और उसने वे सारी चीज़े उतार दी।” — (१ शमूएल १७:३७-३९)
राजा शाऊल का कवच और उसका पीतल का हेलमेट शायद पूरे इस्राएल में सबसे उम्दा और मज़बूत था। यह बिल्कुल स्वाभाविक था कि गोलियात जैसे राक्षस के सामने जाने के लिए दाऊद उस सुरक्षात्मक कवच को पहनना चाहे। उसने उसे पहना भी — लेकिन जल्द ही महसूस किया कि वह उस पर बोझ जैसा है। ख़ुदा ने उसे कवच में नहीं, बल्कि ईमान में मज़बूत किया था।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हम देखते हैं कि दाऊद महज़ अपनी लाठी और गोफ़न के साथ उस राक्षस गोलियात का मुक़ाबला करने निकलता है — न तलवार, न कवच, न ढाल। शायद दाऊद का यही साधारण और मामूली तरीक़ा देखकर गोलियात ने उसे कमज़ोर समझने की ग़लती की और वही सादगी, वही जज़्बा और दलेरी, दाऊद की सबसे बड़ी ताक़त साबित हुई।
हम यक़ीन से नहीं कह सकते कि ऐसा ही हुआ, लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं कि, ख़ुदा वही इस्तेमाल करता है जो हमारे हाथों में है, चाहे वह दूसरों को या हमें ख़ुद को कितना भी साधारण और मामूली क्यों न लगे।
तो आज आपके हाथ या दिल में क्या है? क्या आप उसे ख़ुदा के हवाले करना चाहते है ताकि वो उसे उसकी महिमा के लिए इस्तेमाल करें?