तुम यीशु मसीह की ही सेवा कर रहे हो।
जब मैं छोटी थी, तो एक आयत थी जिसे मैं कभी ठीक से समझ नहीं पाई:
“तु जो कुछ भी करता हैं, उसे पूरे दिल-ओ-जान से कर, जैसे कि तु ख़ुदावंद के लिए, न कि इंसानी मालिकों के लिए; क्योंकि तु जानता हैं कि इनाम के तौर पर, ख़ुदावंद तुझे उसकी विरासत में शामिल करेगा। दरअसल, तु तो ख़ुद यीशु मसीह की सेवा कर रहा हैं।” (कुलुस्सियों ३:२३-२४)
मैं हमेशा सोचती थी कि, “आख़िर इंसानी बॉस के लिए काम करने में बुरा क्या है? कम-से-कम इंसान तो तनख़्वाह देता है!” - मेरे मन में, ख़ुदा के लिए काम करने का मतलब था, हर रविवार को चर्च में वॉलंटियर बनना, बिना कोई तनख़्वाह के! 🤭
लेकिन जब मैं बड़ी हुई और मैंने पहली बार एक मुश्क़िल इंसानी बॉस का सामना किया, मुझे इस आयत का असली मतलब समझ में आया - यह आयत हमें सिखाती है कि हम इंसानी तारीफ या इनाम के लिए नहीं, बल्कि पूरे दिल से, ईमानदारी और मोहब्बत के साथ, हर काम ख़ुदा के लिए करते हैं चाहे वो कलीसिया का काम हो या हमारा रोज़मर्रा का पेशा।
कभी-कभी अपने इरादों को परख़ लेना अच्छा होता हैं। जब आप दाऊद और गोलियात की कहानी पढ़ते हैं, तो ये साफ़ नज़र आता है कि दाऊद के इरादे पूरी तरह पाक़ नहीं थे - मुझे यह समझाने का मौक़ा दो।
उसने सिपाहियों को आपस में इनाम की बातें करते हुए सुना, और फ़िर पूछताछ करने लगा। उसने दूसरों से पूछा कि, “जो इंसान इस फ़िलिस्ती (गोलियात) को मार डालेगा, उसे क्या मिलेगा ?” लोगों ने उसे बताया, “इस्राएल का राजा (शाऊल) उसे बड़ी दौलत के साथ अपनी बेटी, राजकुमारी की शादी भी उससे करेगा और उसके परिवार को इस्राएल के करों से आज़ाद कर देगा।” (१ शमूएल १७:२५-३०)
शायद दाऊद की आँखों में इनाम की चमक आ गई थी, या शायद राजकुमारी से शादी का ख़याल उसे भा गया था, लेकिन इतना तो साफ़ है कि उसके दिल में इनाम की बेहद चाह ज़रूर थी।
फ़िर भी, जो बात मुझे हमेशा हैरान करती है, वो यह है कि ख़ुदा लोगों का इस्तेमाल करता है, भले ही उनमें कई ख़ामियाँ या कमज़ोरियाँ क्यों न हों।
बे-शक़ बाद में, दाऊद की कमज़ोरियाँ ज़ाहिर होती हैं; जिस पर हम, कल बात करेंगे। लेकिन इस वक़्त, उसकी कम उम्र और अनुभव की कमी के बावजूद, ख़ुदा ने दाऊद के साहस और दलेरी का इस्तेमाल, बाइबल की सबसे बड़ी जंगो में से एक में किया।
कभी भी अपने आप को छोटा न समझना - “मैं अभी वहाँ नहीं पहुँची हूँ,” या “मेरी ज़िंदगी में अभी बहुत सी ख़ामियाँ हैं।” ख़ुदा की सेवा में इस्तेमाल करने के लिए, ख़ुदा तुम्हे क़ाबिल बनाएगा।