तेरा ख़ुदा तेरे साथ चलता है।
हम आज भजन संहिता २३ से सीखते हुए पाँचवें दिन तक आए हैं — “यहोवा मेरा चरवाहा है,” कल हमने यह बातचीत की, की दाऊद की रूह को तरोताज़ा करने की ज़रूरत थी, यानी ख़ुदा ने दाऊद की आत्मा को टूटने दिया ताकि वह उसे फ़िर से ताज़ा कर सके。
आज, मैं इसी बात पर थोड़ा और गहराई से मनन करना चाहता हूँ, क्योंकि अगले ही आयत में दाऊद लिखता है:
“चाहे मैं मौत की साया-दार तराई से क्यों न गुज़रूँ, मैं किसी बुराई से नहीं डरूँगा, क्योंकि तू मेरे साथ हैं; तेरी लाठी और तेरी सोंटी मुझे तसल्ली देती हैं।”— भजन संहिता २३:४
वही चरवाहा, जिसके बारे में दाऊद ने पहले तीन आयतों में लिखा था, जो उसे हरी-भरी चराइयों और सुक़ून भरें झीलों के पास ले जाता है — अब वही उसे “मौत की साया-दार तराई” से ले चल रहा है। यह जगह तो बिल्कुल भी मज़ेदार नहीं लगती, है ना? 😬
दाऊद इस “तराई” से अच्छी तरह से वाक़िफ़ था। वह कई बार लड़ाई में अपने दुश्मनों से लड़ा, उसने मौत के डर को बहुत क़रीब से महसूस किया था।
बाइबल बार-बार यह दिखाती है कि ख़ुदा अपने लोगों को लड़ाइयों, आँधियों, अकालों या आपदाओं से बचाकर नहीं रखता।
आयत ४ की चाबी इन दो अल्फ़ाज़ों में छिपी है: मेरे साथ।
दाऊद कहता है, “ऐ ख़ुदा, तू मेरे साथ हैं।” और यही उसके लिए सबसे अहम बात थी। वह अपनी हालातों पर और इर्दगिर्द नहीं, बल्कि उस पर नज़र टिकाकर रखता है जो उसे रास्ता दिखा रहा है。
यही बात आज हमारी ज़िंदगी पर भी लागू होती है。
क्या आप भी किसी तकलीफ़, लड़ाई या “साया-दार तराई” से होकर गुज़र रहे हैं? तो मैं दुआ करता हूँ कि यह आयत आपको हिम्मत दें:
“दबंग और दिलेर रहो। डरो मत और उनकी वजह से घबराओं मत, क्योंकि तुम्हारा खुदावंद - ख़ुदा तुम्हारे साथ चलता है। वो कभी तुम्हे तन्हा नहीं छोड़ेगा, न ही कभी ठुकराएगा।” — व्यवस्थाविवरण ३१:६