सारी फ़ज़ल का ख़ुदा तुझे पुनर्स्थापित करेगा और ताक़तवर बनाएगा।
क्या आप किसी ऐसी चीज़ को ठीक करेंगे जो टूटी ही नहीं है? क्या आप ऐसे ज़ख़्म को सीएँगे जो है ही नहीं? क्या आप उस दाग़ को साफ़ करेंगे जो कभी लगा ही नहीं? बिलकुल नहीं।
जब मैंने भजन संहिता २३:३ पढ़ी, तब मेरे दिल को एक बात गहराई से छु गई:
“वह मेरी रूह को तरोताज़ा करता है। वह अपने नाम के ख़ातिर, मुझे सही राहों पर चलाता है।” — भजन संहिता २३:३
दाऊद लिखता है कि ख़ुदा उसकी रूह को तरोताज़ा करता है। इससे यह ज़ाहिर होता है कि किसी न किसी रूप में, दाऊद की रूह टूटी हुई थी और उसे ताज़गी की ज़रूरत थी।
मसीही ज़िंदगी में यह समझना बेहद ज़रूरी है कि, ख़ुदा हमे रहनुमाई, हिफ़ाज़त और प्रबंध करने का वादा करता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह हमें कभी “टूटने” नहीं देगा। इस बात को सदा याद रखें।
यीशु मसीह ने कहा:
“मैं ने तुमसे यह बातें इसलिये कहीं कि तुम मुझ में सुक़ून पाए। इस दुनिया में तुम्हें तक़लीफें होंगी, लेक़िन होंसला रखें, क्योंकि मैंने दुनिया पर जीत हासिल की है।” — यूहन्ना १६:३३
अक़सर प्रचारक यह कहना पसंद करते हैं कि जब कोई इंसान मसीही बन जाता है, तो उसकी ज़िंदगी एक़दम आसान हो जाती है —बिना किसी दर्द, मुश्किलें या आज़माइश के। सबको यह यक़ीन करना अच्छा लगता है, पर बाइबल ऐसा नहीं सिखाती। मिसाल के तौर पर:
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ख़ुदा ने शैतान को अय्यूब को आज़माने की इजाज़त दी, ताकि उसकी वफ़ादारी परखी जा सके। (अय्यूब १:८–१२)
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पौलुस के शरीर में एक चुभाया गया काँटा था और जब उसने ख़ुदा से उसे हटाने की दुआ की, तब ख़ुदा ने कहा कि “मेरी फ़ज़ल तेरे लिये काफ़ी है।” (२ कुरिन्थियों १२:७–९)
- पवित्र आत्मा, यीशु मसीह को रेगिस्तान में ले गया ताकि उसकी आज़माइश हो सके। (मत्ती ४:१)
यहाँ एक ख़ुशख़बर हैं कि राजा दाऊद की तरह, आज आपकी रूह को भी ताज़गी ज़रूर मिलेगी।
“सारी फ़ज़ल का ख़ुदा, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनतक़ाल की महिमा के लिए बुलाया है — वह थोड़ी देर की आज़माइश के बाद, ख़ुद तुम्हें फ़िर से उठाएगा, तरोताज़ा करेगा, और तुम्हें मज़बूत, क़ायम और अटल बना देगा।” — १ पतरस ५:१०