वह मुझे हरी-भरी चराइयों में बिठाता है।
क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी काम में इतने मशग़ूल हो गए हों कि आपको खाना, आराम करना या पानी पीना भी याद न रहता हो?
जेनी जानती है कि जब मैं रिकॉर्डिंग स्टूडियो में, इबादत के गीत लिखने और प्रोड्यूस करने में मशग़ूल हो जाता हूँ, तब वक़्त ठहर-सा जाता है। मैं घंटों तक बिना रुके लगातार काम करता रहता हूँ। तब वो ही है जो मुझे याद दिलाती है कि, थोड़ा आराम कर लो या मेरे लिए खाना लेकर आ जाती है।
ठीक उसी तरह, हमारा ख़ुदा भी जानता है कि हमें क्या चाहिए, भले ही हमें ख़ुद को एहसास न हो।
भजन संहिता २३ में दाऊद, ख़ुदा की तुलना एक चरवाहे से करते हुए लिखता है:
*“वह मुझे हरी-भरी चराइयों में बिठाता है,वह मुझे सुक़ून भरे झील के किनारे ले चलता है,वह मेरी रूह को तरोताज़ा करता है।वह अपने नाम के ख़ातिर,मुझे सही राहों पर चलाता है।”— भजन संहिता २३:२–३
यहाँ एक ख़ास बात है। चरवाहा ज़्यादा सक्रिय है। वही रहनुमाई, अगुवाई और तरोताज़ा करता है। भेड़ों को बस उसका अनुसरण करना होता है। यहाँ तक कि उन्हें हरी-भरी घास पर लिटाने का काम भी वही करता है।
हमारी मसीही ज़िंदगी में कई बार ऐसा महसूस होता है कि चाहे हम कितना भी कर लें, कुछ न कुछ अधूरा रह ही जाता है — जैसे और सुसमाचार बाँटना, और लोगों की रहनुमाई करना, या और गहराई से बाइबल पढ़ना और दुआ में वक़्त बिताना। ये सब बातें बेहद अच्छी और ज़रूरी हैं, मगर इनमें से एक बात न भूलें कि ख़ुदा आपको विश्राम देना चाहता है — इसलिए उसे आपको विश्राम देने की इजाज़त दें।
*“तुम्हारा उद्धार, पश्चाताप और विश्राम में है; तुम्हारी ताक़त, ख़ामोश रहने और यक़ीन करने में है।” — यशायाह ३०:१५
सिर्फ़ महफ़ूज़ हालातों में भेड़ विश्राम करते हैं और बे-ख़ौफ़ रहते हैं। दाऊद यह बात अच्छी तरह जानता था, क्योंकि वह ख़ुद भी चरवाहा था। (१ शमूएल १७:३४)
खुदा चाहता है कि वह आपको एक ऐसी जगह पर ले चले — जहाँ विश्राम, सुक़ून और यक़ीन हैं, जहाँ आप पूरी तरह महफ़ूज़ महसूस करें और उसकी हुज़ूरी में सुक़ून से रह सकें।