हमारी ज़िंदगी के सफ़र में, ख़ुदा ने हमे थामा है।
पिछली गर्मियों में, कॅमरॉन और मैंने कुछ दिन स्विट्ज़रलैंड की वादियों में गुज़ारे। एक सुबह, हमारे मन में अचानक एक रोमांचक ख़्याल आया —क्यों न आज ‘अल्पाइन कोस्टर’ का मज़ा लिया जाए! यह एक छोटी-सी रेल जैसी सवारी होती है जो पहाड़ों की ऊँचाइयों से घुमावदार रास्तों पर से फ़िसलती हुई तेज़ रफ़्तार में नीचे ज़मीन की ओर उतरती है। जहाँ से यह सवारी शुरू होती है, वहाँ तक पहुँचने के लिए आप या तो लिफ़्ट ले सकते हैं — या फिर पहाड़ के कच्चे रास्तों पर चढ़ाई करते हुए पैदल जा सकते हैं। वर्कआउट के जोश में, हमने सोचा — चलो पैदल चलते हैं!
दिखने में वह एक छोटी-सी चढ़ाई लगी, पर जल्द ही हमें एहसास हुआ कि हमारा अंदाज़ा बिलकुल ग़लत था। रास्ता ढ़लानदार और तीखा था, और तेज़ धूप में चलना, सच कहुँ तो, एक मुश्किल चुनाव साबित हुआ। आख़िरकार हम ऊपर तो पहुँच गए, लेकिन तब तक पसीने में भीगे, पैर छालों से भरे, और धूप से जली त्वचा के साथ बस थकान से एक-दूसरे को देख रहे थे।😣
इस पर मैं अंदाज़ा लगा सकती हूँ कि नवजात राजा, यीशु मसीह को देखने के लिए, उन ३ राजाओं (मैजाई) के लम्बे सफ़र का कुछ हिस्सा, शायद थकान भरा और पछतावा से भरा रहा होगा - मत्ती २:१-१६।
अनजाने में, उन्होंने उस बुरे और बेरहम राजा हेरोद को यह ख़बर दी कि एक नया राजा पैदा हुआ है। यह सुनकर, ईर्ष्या और डर से पागल हुए हेरोद ने, अपने शासन के सभी दो साल तक के पुरुष बच्चों की हत्या का भयानक हुक़्म जारी कर दिया —एक ऐसा अत्याचार, जिसे इतिहास आज भी “निर्दोषों का क़त्लेआम” के नाम से याद करता है।
हमारी ज़िंदगी का सफ़र, ख़ासकर रूहानी सफ़र, भी ख़तरों से खाली नहीं होता हैं। हम भी ऐसे कई “हेरोदों” से घिरे हुए हैं—मसीहियों से नफ़रत करने वाली ताकतों और बुरी शक्तियों से। पूरी दुनिया में, भारत में भी, मसीहियों का सताया जाना, तेज़ी से बढ़ रहा है।
मैजाई की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि, ख़ुदा की तलाश में सफ़र चाहे कितना भी लम्बा, अधूरा और ख़तरों से भरा क्यों न हो, हमे रूकना नहीं चाहिए।
एक सपने के ज़रिए, ख़ुदा ने उन ३ राजाओं को सावधान किया और उन्हें आदेश दिए कि वे सुरक्षित रूप से अपने घर लौट सकें। हमे परिपूर्ण होने से ज़्यादा, होशियार, सतर्क़ और सावधान रहना ज़रूरी हैं - ख़ुदा की रहनुमाई के लिए तैयार रहे, और उसके मुताबिक़ आगे बढ़े।
जैसा कि रूथ हेली बार्टन कहती हैं:
“जैसे ख़ुदा उन मैजाई के साथ था, वैसे ही वो हमारी ज़िंदगी के सफ़र में, हमारे साथ है।”