हम उसकी इबादत करने आए हैं।
इस हफ्ते, ६ जनवरी को ‘३ राजाओं का दिन’ मनाया जाता हैं, जिसका दूसरा नाम एपिफ़नी की दावत है। यह मत्ती २:१-१२ की कहानी पर आधारित है जहाँ कुछ राजा (जिन्हें मैजाई या ज्ञानी इंसान भी कहा जाता है), यीशु मसीह से मिलने आए थे। दिलचस्प बात यह है कि बाइबल में यह कहीं नहीं लिखा हैं कि वे कितने थे — लेकिन सरलता और परंपरा के हिसाब से, हम ३ ही मान लेते हैं।😉
एपिफ़नी के दौरान, हम उस पल को याद करते हैं जब यीशु मसीह पूरी दुनिया पर ज़ाहिर हुआ, जब ख़ुदा ने अपने बेटे को मानवजाति के सामने उजागर किया।
आपने शायद किसी को यह कहते सुना होगा —“अब समझ में आया!” यानि किसी पल उन्हें अचानक कोई ग़हरी समझ मिली, जैसे किसी ने उनके दिल की आँखें खोल दी हों। असल में, इसी अनुभव की जड़ "एपिफ़नी" के त्योहार से जुड़ी है — क्योंकि यीशु मसीह ही वह सच्चा प्रकाशन और उद्धारकर्ता हैं, जो हर दिल को रौशनी और समझ देने आया था, और जिसकी हमें आज भी उतनी ही ज़रूरत है।
जहाँ क्रिसमस, मसीहा के आगमन के इंतज़ार पर केंद्रित है, वहीं एपिफ़नी हमें “सक्रिय रूप से यीशु मसीह की तलाश करने के सफ़र” पर दावत देता है - जैसे उन ३ राजाओं (मैजाई) ने, नए राजा की तलाश में दूर-दूर तक का सफ़र तय किया। इस हफ्ते हम यही जानने पर ग़ौर करेंगे कि हक़ीक़त में यीशु मसीह को सक्रिय रूप से तलाश करने का मतलब क्या है और यह हम ३ राजाओं की कहानी के ज़रिए से करेंगे।
सबसे पहले जिस बात पर ग़ौर करना ज़रूरी है, वह यह कि वे महज़ अमीर या ज्ञानी इंसान नहीं थे, और न ही किसी राजनीतिक अर्थ में राजा थे। वे मैजाई थे — दुनियावी ज्योतिषी, जो सितारों और आकाशीय संकेतों के अध्ययन में लगे रहते थे। लेकिन उस ज़माने के यहूदी क़ानून के अनुसार, ज्योतिष और भविष्यवाणी जैसी सारी प्रथाएँ, निषिद्ध मानी जाती थीं (व्यवस्थाविवरण १८:१०-१२)। फ़िर भी, इन्हीं बाहरी लोगों को — जो व्यवस्था के बाहर थे —ख़ुदा ने अपने बेटे के जन्म का राज़ ज़ाहिर किया।
अगर आप एक मसीही परिवार में पले-बढ़े हैं, तो आपके माता-पिता और पासबान ने भी शायद आपको राशिफ़ल या ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ पढ़ने से मना किया होगा, ठीक उसी वजह से। जब ये मैजाई यरूशलेम पहुँचे, तो उन्होंने कहा कि वे यहूदियों के राजा, यीशु मसीह की इबादत करने आए हैं (मत्ती २:२)।
मुझे यह हमेशा आश्चर्यचकित करता है कि यीशु मसीह की हुज़ूरी में महज़ मसीही लोग नहीं बल्कि दुनियावी या भटके हुए भी सजदा करते हैं। ख़ुदा किसी को भी अपने ओर खींच सकता है!
मैंने दूसरे मज़हब के लोगों की गवाही सुनी है, जिन्होंने सपनों में यीशु मसीह को देखा और उन शैतान की इबादत करनेवालों की भी, जिनकी ज़िंदगी यीशु मसीह ने पूरी तरह बदल दी।
इस हप्ते, जैसे हम सक्रिय रूप से ख़ुदा की तलाश कर रहे हैं, वैसे ही ख़ुदा भी आपकी तलाश कर रहा है!