मुझे आज़मा और मेरे बेचैन ख़यालात को पहचान।
एक चीज़ जो मैंने सालों में सीखी है, वह यह है कि अपने निजी जज़्बातों को महसूस करना कितना अहम है। मुझे पता है यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन मेरे साथ बने रहिए, मैं इस बात को सही रीती से समझाऊँगा।
हम सबके पास जज़्बात और एहसास होते हैं - यीशु मसीह के पास भी थे (मिसाल के तौर पर: युहन्ना ११:३५, मरकुस ३:५, और मत्ती २६:३७। लेकिन हमें यह भी पता है कि जज़्बात कभी-कभी दग़ाबाज़ हो सकतें हैं और जैसे-जैसे हम उम्र बड़े होते हैं, हमें सिखाया जाता है कि उन पर यक़ीन न करें।
*“सारी चीज़ों से ज़्यादा, दिल दग़ाबाज़ है और इसका पूरी तरह से इलाज नहीं है। कौन इसे समझ सकता है?” – यिर्मयाह १७:९
लेकिन जज़्बातों को नजरअंदाज करने में ख़तरा यह है कि वे लगातार हमारे अंदर बनी रहेंगी। उसका हल यह नहीं है कि आप उन्हें दबाएँ रखे, बल्कि यह है कि आप उन्हें महसूस करें। अपने जज़्बातों की सूचि बनाए, उन्हें अपनाएँ और फ़िर ख़ुदा के हवाले कर दें।
आज आप अपने आप से यह सवाल पूछें: मैं इस नए साल की शुरुआत में क्या महसूस कर रहा हूँ?
कुछ आगे के सवाल ऐसे हो सकते हैं:
- पिछले साल को या अभी के मौजूदा हालातों को, आप कौनसे ख़ास लफ्ज़ में बयान करेंगे?
- आप किसके इंतज़ार में हैं?
- आप किस चीज़ से डर रहे हैं?
- आप किस बात से मायूस हैं?
- आप किस चीज़ की उम्मीद रखते हैं?
- आप किस बात से परेशान हैं या समझने की क़ोशिश कर रहे हैं?
बाइबल में राजा दाऊद एक शख़्स था जो अपने जज़्बातों को महसूस करने और फ़िर उन्हें ख़ुदा के हवाले करने में माहिर था।
मिसाल के तौर पर, भजन संहिता १३९ पढ़ें, जहाँ राजा दाऊद अलग-अलग जज़्बातों से गुज़रता हैं और उन्हें ख़ुदा से ज़ाहिर भी करता हैं।
क्या आप अपने आप को राजा दाऊद की लिखी बातों में पहचानते हैं?
राजा दाऊद अपने जज़्बाती बहाव के आख़िर में यह कहता है:
*”ऐ ख़ुदा, मुझे आज़माकर देख, मेरे दिल को जान, मुझे आज़मा और मेरे बेचैन ख़यालात को पहचान। देख, अग़र मुझ में कोई ग़लत बात है और मुझे तेरे क़ायम रहने वाले रास्तों पर चला।” – भजन संहिता १३९:२३-२४
राजा दाऊद जानता है कि, उसके जज़्बात महज़ जज़्बात नहीं हैं और वह उन्हें ख़ुदा के हवाले करता हैं।
जब आप अपनी सच्चे और ईमानदार जज़्बातों को ख़ुदा के सामने ज़ाहिर करें तो दाऊद के अल्फ़ाज़ो का इस्तेमाल करके वही दुआ करे।